Ashok Dham Stampede:  बिहार के लखीसराय स्थित ऐतिहासिक अशोकधाम, जिसे इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, में 17 अगस्त को सावन की तीसरी सोमवारी के दौरान मची भीषण भगदड़ के हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत बकमा गांव निवासी सविता देवी की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह कई दिनों से पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थीं।

सविता देवी की मौत के बाद अशोकधाम भगदड़ हादसे ने एक बार फिर लोगों को झकझोर दिया है। इस हादसे में अब तक जान गंवाने वाले सभी आठ श्रद्धालु महिलाएं हैं। वहीं, हादसे में घायल अन्य लोगों का भी इलाज कराया गया था।

देर रात अचानक बिगड़ी तबीयत, वेंटिलेटर पर रखा गया

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार की देर रात सविता देवी की तबीयत अचानक अत्यधिक बिगड़ गई। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें तत्काल जीवन रक्षक प्रणाली यानी वेंटिलेटर पर रखा। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए लगातार इलाज किया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो सका।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार की देर रात से ही उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई थी। तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद रात करीब एक बजे सविता देवी ने दम तोड़ दिया। उनकी मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिवार के लोग गहरे सदमे में हैं।

लखीसराय से निजी अस्पताल, फिर पीएमसीएच किया गया था रेफर

17 अगस्त की सुबह अशोकधाम मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में मची भगदड़ के दौरान सविता देवी भी भीड़ की चपेट में आ गई थीं। भगदड़ में दबने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। घटना के तुरंत बाद उन्हें इलाज के लिए लखीसराय सदर अस्पताल पहुंचाया गया था।

हालांकि उनकी हालत गंभीर बनी रही। इसके बाद परिजन उन्हें शहर के ममता इमरजेंसी हॉस्पिटल लेकर गए, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए बेहतर इलाज की सलाह दी। इसके बाद उसी दिन उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल यानी पीएमसीएच रेफर कर दिया गया। पीएमसीएच पहुंचने के बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था। वहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद आखिरकार सविता देवी ने दम तोड़ दिया।

अशोकधाम हादसे में अब तक आठ महिलाओं की मौत

अशोकधाम भगदड़ त्रासदी में अब तक जिन आठ श्रद्धालुओं की मौत हुई है, वे सभी महिलाएं हैं। मृतकों की सूची में मनमाला देवी, रिंकू देवी, हेमलता देवी, ललिता देवी, सविता कुमारी, सरोज देवी, सावित्री देवी और पटना के बाढ़-बकमा गांव निवासी सविता देवी शामिल हैं।

एक और घायल श्रद्धालु की मौत के बाद मृतकों की संख्या आठ हो जाने से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने भी हादसे से जुड़े सवाल फिर खड़े हो गए हैं। यह घटना सावन की सोमवारी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने के दौरान हुई थी।

करंट फैलने की अफवाह के बाद मची थी अफरातफरी

जानकारी के अनुसार, 17 अगस्त की अहले सुबह अशोकधाम मंदिर में जलाभिषेक के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान मंदिर के दक्षिणी प्रवेश द्वार और रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले संकरे मार्ग पर अचानक अफरातफरी मच गई।

प्रत्यक्ष जानकारी के मुताबिक, एक बिजली का पोल झुक गया था और तारों से चिंगारी निकलने की बात सामने आई। इसके बाद भीड़ के बीच करंट फैलने की अफवाह तेजी से फैल गई। देखते ही देखते श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। संकरे रास्ते पर बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ भागने के कारण कई श्रद्धालु जमीन पर गिर पड़े। उनके ऊपर से भीड़ गुजरने लगी, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। भगदड़ में कुल 27 श्रद्धालुओं के घायल होने की बात सामने आई थी।

सावन की सोमवारी का धार्मिक उत्साह मातम में बदला

अशोकधाम में सावन की सोमवारी पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। 17 अगस्त को भी सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। लेकिन कुछ ही पलों में धार्मिक उत्साह का माहौल चीख-पुकार और मातम में बदल गया।

हादसे में अब तक आठ महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई श्रद्धालु घायल हुए थे। सविता देवी की मौत के बाद इस त्रासदी ने पीड़ित परिवारों का दर्द और बढ़ा दिया है। अब इस हादसे को लेकर भीड़ प्रबंधन, संकरे मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अशोकधाम भगदड़ कांड बिहार के हालिया बड़े धार्मिक हादसों में शामिल हो गया है। जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ लोगों की नजर अब इस बात पर भी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस इंतजाम किए जाते हैं।