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11-Mar-2026 08:04 AM
By First Bihar
PATNA : लालू परिवार के बेहद करीबी माने जाने वाले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पूर्व विधायक अरुण यादव और उनकी पत्नी किरण देवी के साथ साथ उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संदेश विधानसभा क्षेत्र के पूर्व राजद विधायक अरुण यादव उर्फ अरुण कुमार सिंह, उनकी पत्नी किरण देवी, राजेश कुमार रंजन, दीपु कुमार और किरण दुर्गा कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया है। इस मामले में ईडी ने मंगलवार को पटना स्थित पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है।
बता दें कि अरुण यादव की पत्नी किरण देवी भी विधायक रही हैं। वही बेटे दीपू कुमार उर्फ दीपू राणावत को राजद ने पिछले चुनाव में अपना कैंडिडेट बनाया था।ये वही अरुण यादव हैं, जिन पर राबड़ी देवी से करोड़ों की अवैध सम्पत्ति खरीदने का आरोप लग चुका है. वे लालू परिवार के बेहद करीबी माने जाते है.
अवैध बालू खनन और भ्रष्टाचार से अकूत कमाई
ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अवैध बालू खनन, भ्रष्टाचार और अन्य आपराधिक गतिविधियों के जरिए बड़ी मात्रा में अवैध धन अर्जित किया। जांच एजेंसी के मुताबिक इस धन को छिपाने और वैध दिखाने के लिए विभिन्न तरीकों से निवेश किया गया।
ईडी के अनुसार, साल 2014-15 से 2024-25 के बीच अरुण यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने करीब 39.31 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की। वहीं इस अवधि में उनकी घोषित और वैध आय करीब 2.65 करोड़ रुपये ही पाई गई। इस तरह जांच में लगभग 36.66 करोड़ रुपये की संपत्ति आय से अधिक पाई गई है।
छापेमारी में सामने आए कई तथ्य
जांच के क्रम में ईडी ने 27 फरवरी 2024 को अरुण यादव, उनकी पत्नी और किरण दुर्गा कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी आरा के अगियांव समेत पटना के विभिन्न स्थानों पर की गई थी। ईडी के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया कि अवैध रूप से अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए नकद जमा, डेयरी और पशुपालन जैसे व्यवसायों के जरिये अधिक आय दर्शाई गई। इसके अलावा किरण दुर्गा कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से भी धन को इधर-उधर घुमाकर उसे वैध आय के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।
अचल संपत्तियों में किया गया निवेश
जांच एजेंसी के अनुसार अवैध धन का उपयोग कर कृषि भूमि, फ्लैट और पटना में व्यावसायिक भूखंड समेत कई अचल संपत्तियां खरीदी गईं। इन संपत्तियों के जरिए अवैध कमाई को छिपाने और उसे वैध संपत्ति में बदलने का प्रयास किया गया।
21.38 करोड़ की संपत्ति कुर्क
ईडी ने जांच के दौरान लगभग 21.38 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। बाद में धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत बने निर्णायक प्राधिकरण ने भी इस कार्रवाई की पुष्टि कर दी।बताया गया है कि अक्टूबर 2024 में ईडी ने आरोपियों के बैंक खातों में जमा करीब 20 करोड़ रुपये की राशि, पटना के गोला रोड इलाके में स्थित पांच फ्लैट, प्लॉट, महलनुमा मकान और अन्य संपत्तियों को भी जब्त कर लिया था।
बिहार पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई जांच
ईडी की यह कार्रवाई बिहार पुलिस और विशेष निगरानी इकाई (SVU) द्वारा दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी। इन मामलों में धोखाधड़ी, रंगदारी और अवैध बालू खनन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। गौरतलब है कि वर्ष 2024 में एसवीयू ने पूर्व विधायक के खिलाफ अवैध कमाई को लेकर मामला दर्ज करने की अनुशंसा की थी। इसके बाद केस दर्ज होते ही ईडी ने अपने स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच शुरू कर दी थी। अब आरोप पत्र दाखिल होने के बाद इस मामले में अदालत में सुनवाई आगे बढ़ेगी।