पटना: बिहार की राजनीति में मोकामा का नाम आते ही कई बड़े सियासी चेहरे और पुराने राजनीतिक समीकरण याद आने लगते हैं। इन्हीं में एक नाम अनंत सिंह और दूसरा नीरज कुमार का है। दोनों नेताओं के बीच की राजनीतिक खींचतान कोई नई कहानी नहीं है। करीब एक दशक पहले शुरू हुई यह सियासी अदावत समय के साथ कई मोड़ से गुजरती हुई अब एक बार फिर खुली बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गई है।

2026 के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव से पहले दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग ने पुरानी घटनाओं को फिर चर्चा में ला दिया है। हालिया विवाद में अनंत सिंह ने नीरज कुमार को आमने-सामने बहस की चुनौती दी है और 20 करोड़ रुपये की शर्त की बात कही है। दूसरी ओर नीरज कुमार ने भी आरोपों का जवाब देते हुए सबूत अदालत में रखने की बात कही है।


1. कहानी की शुरुआत 2015 के मोकामा चुनाव से

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक टकराव को समझने के लिए सबसे पहले 2015 के मोकामा विधानसभा चुनाव को देखना होगा। उस समय अनंत सिंह मोकामा में एक प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति थे, लेकिन उसी वर्ष जून में एक हत्या के मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। उस समय जेडीयू ने मोकामा से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। वहीं अनंत सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरकर मुकाबले को सीधा बना दिया। इस दौरान चुनाव प्रचार के दौरान तीखी नोकझोंक हुई, जिसमें नीरज कुमार ने बार-बार अनंत सिंह के राजनीतिक रिकॉर्ड और आपराधिक मामलों पर सवाल उठाए, जबकि अनंत सिंह के समर्थकों ने नीरज कुमार को उनका मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बताया।हालांकि, नतीजा बेहद चर्चित रहा। अनंत सिंह को 54,005 वोट, जबकि नीरज कुमार को 35,657 वोट मिले। इस तरह अनंत सिंह ने नीरज कुमार को 18,348 वोटों के अंतर से हराया। इसके बाद अनंत सिंह खुद की बताते हैं की नीरज कुमार की वजह से उनके राजनीतिक पथ बदलते रहे, लेकिन जब भी उनके रास्ते आपस में टकराते थे, दोनों नेताओं के बीच मतभेद फिर से उभर आते थे।


2. चुनाव खत्म हुआ, लेकिन सियासी टकराव नहीं

2015 के चुनाव के बाद दोनों नेताओं की राजनीतिक राहें अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ती रहीं। हालांकि मोकामा की राजनीति में दोनों के नाम जब-जब आमने-सामने आए, पुरानी तल्खी की चर्चा भी होती रही। समय के साथ अनंत सिंह अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों से गुजरते हुए फिर जेडीयू में लौटे। लेकिन पार्टी में वापसी के बावजूद नीरज कुमार के साथ उनके मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए। इसी पुराने राजनीतिक तनाव की वजह से बाद की घटनाओं को भी दोनों नेताओं के बीच चल रहे विवाद के संदर्भ में देखा गया।


3. 2019 का AK-47 मामला बना बड़ा मोड़

दोनों नेताओं के विवाद में सबसे बड़ा मोड़ अगस्त 2019 में आया। पुलिस ने बाढ़ अनुमंडल के लदमा गांव स्थित अनंत सिंह के पैतृक आवास पर छापेमारी की। पुलिस कार्रवाई में AK-47, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद होने का मामला सामने आया। इसके बाद अनंत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और उन्होंने बाद में दिल्ली की अदालत में आत्मसमर्पण किया। यह मामला आगे चलकर लंबी कानूनी प्रक्रिया में बदल गया। निचली अदालत से दोषसिद्धि के बाद अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता भी प्रभावित हुई।

लेकिन बाद में इस मामले में बड़ा कानूनी बदलाव आया। 14 अगस्त 2024 को पटना हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अनंत सिंह और सुनील राम को बरी कर दिया। हाईकोर्ट के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।


4. AK-47 मामले में नीरज कुमार पर क्या आरोप लगा?

2019 की घटना के बाद अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि उनके घर से बरामद हथियारों के मामले में नीरज कुमार की भूमिका थी। हालिया बयानबाजी में भी यह आरोप दोहराया गया है। हालांकि नीरज कुमार ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि अगर किसी के पास उनके खिलाफ सबूत है तो उसे अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए। इसलिए इस पूरे हिस्से में एक बात स्पष्ट है—यह अनंत सिंह का आरोप है, जिसका नीरज कुमार ने खंडन किया है। इसे स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।


5. व्यक्तिगत तंज ने बढ़ाई राजनीतिक तल्खी

दोनों नेताओं की बयानबाजी सिर्फ चुनावी मुद्दों तक सीमित नहीं रही। समय-समय पर एक-दूसरे पर व्यक्तिगत टिप्पणियां भी सामने आती रही हैं। मीडिया रिपोर्टों में नीरज कुमार की ओर से अनंत सिंह के लिए 'पुदीना सिंह' जैसे तंज का भी जिक्र मिलता है। इससे दोनों के बीच चल रहे राजनीतिक विवाद को व्यक्तिगत रंग मिलने की बात कही गई। यानी मोकामा की यह लड़ाई सिर्फ वोट और चुनावी टिकट की कहानी नहीं रही, बल्कि समय के साथ इसमें पुराने आरोप, व्यक्तिगत बयान और राजनीतिक हिसाब-किताब भी जुड़ते गए।


6. 2026 में फिर आमने-सामने क्यों आए अनंत-नीरज?

अब आते हैं मौजूदा विवाद पर।2026 के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव को लेकर नीरज कुमार का नाम चर्चा में है। इसी बीच अनंत सिंह ने साफ किया कि वह नीरज कुमार के समर्थन में नहीं हैं और उन्होंने डॉ. अनुज कुमार के समर्थन की बात कही है। हालिया रिपोर्टों में अनंत सिंह के इस रुख को लेकर जेडीयू के भीतर भी चर्चा का उल्लेख है। अनंत सिंह का कहना है कि जब पहले नीरज कुमार ने उनका विरोध किया था तो उस समय पार्टी स्तर पर ऐसी बैठक नहीं हुई थी। उनका सवाल है कि अब उनके अलग उम्मीदवार के समर्थन पर उनसे सवाल क्यों किए जा रहे हैं।


7. 20 करोड़ की शर्त ने बढ़ा दिया विवाद

विवाद ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब अनंत सिंह ने नीरज कुमार को खुली बहस की चुनौती दी।रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा कि दोनों आमने-सामने बैठकर विवादित मुद्दों पर चर्चा करें। इसके साथ ही उन्होंने 20 करोड़ रुपये की शर्त की बात कही।एक रिपोर्ट के अनुसार चुनौती का स्वरूप यह था कि अगर नीरज कुमार जीतते हैं तो उन्हें दोनों तरफ की रकम मिलाकर 40 करोड़ रुपये तक मिलने की बात कही गई। इस बयान के बाद मोकामा से लेकर पटना तक राजनीतिक हलकों में दोनों नेताओं की पुरानी अदावत फिर चर्चा का विषय बन गई।


8. नीरज कुमार ने भी दी जवाबी चुनौती

अनंत सिंह के आरोपों के बाद नीरज कुमार की ओर से भी जवाब आया। हालिया बयान में उन्होंने नार्को टेस्ट के मुद्दे पर कहा कि अगर अनंत सिंह ऐसा परीक्षण चाहते हैं तो इसके लिए अदालत का रास्ता अपनाया जा सकता है। नीरज कुमार ने आरोपों के जवाब में सबूत पेश करने की बात भी दोहराई है। इस तरह विवाद अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि पुराने AK-47 मामले और उससे जुड़े आरोपों तक भी पहुंच गया है।


9. मोकामा की राजनीति से निकलकर MLC चुनाव तक पहुंची लड़ाई

अनंत सिंह और नीरज कुमार की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इसकी शुरुआत मोकामा विधानसभा चुनाव से हुई थी, लेकिन अब इसका असर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव की राजनीति में दिखाई दे रहा है।यानी करीब एक दशक पहले का विधानसभा चुनाव, 2019 का हथियार मामला, उसके बाद की कानूनी लड़ाई और अब 2026 का एमएलसी चुनाव—इन सभी घटनाओं ने दोनों नेताओं के बीच विवाद की अलग-अलग परतें जोड़ दी हैं।हालांकि जेडीयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी में किसी बड़े आंतरिक मतभेद से इनकार किया है। हालिया रिपोर्टों में संजय झा और ललन सिंह की ओर से पार्टी की एकजुटता को लेकर बयान भी सामने आए हैं।


10. अब सबकी नजर आगे की सियासी लड़ाई पर

फिलहाल अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच बयानबाजी का दौर जारी है। एक तरफ अनंत सिंह पुराने आरोपों को लेकर नीरज कुमार पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ नीरज कुमार सबूत और कानूनी प्रक्रिया की बात कर रहे हैं।2026 के पटना स्नातक एमएलसी चुनाव के दौरान यह विवाद कितना आगे जाता है, यह आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से स्पष्ट होगा। लेकिन इतना जरूर है कि 2015 में मोकामा की चुनावी टक्कर से शुरू हुई अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार की कहानी 2026 में एक बार फिर सुर्खियों में लौट आई है। पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, 2019 का AK-47 मामला, अदालत का 2024 का फैसला और अब 20 करोड़ की खुली चुनौती—इन घटनाओं ने इस सियासी कहानी को फिर बिहार की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।