मोकामा के विधायक और ‘छोटे सरकार’ के नाम से चर्चित अनंत सिंह पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) की कार्रवाई के बाद अब पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का बयान सामने आया है। अनंत सिंह के खिलाफ पार्टी लाइन से अलग जाकर काम करने और पार्टी के फैसले के विरोध को लेकर जेडीयू ने सख्त रुख अपनाया है। इसी बीच संजय झा ने साफ कर दिया कि पार्टी में किसी भी नेता के लिए अनुशासन से ऊपर कुछ नहीं है। संजय झा ने कहा कि कोई भी राजनीतिक पार्टी अनुशासन के आधार पर चलती है। अगर पार्टी में अनुशासन खत्म हो जाए तो संगठन के अंदर अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने इसी संदर्भ में राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि जिस तरह की राजनीति राहुल गांधी देश में करना चाहते हैं, अगर वैसी ही अराजकता किसी पार्टी के भीतर आने लगे तो संगठन को चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए जेडीयू में पार्टी अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


संजय झा का यह बयान ऐसे समय आया है जब मोकामा विधायक अनंत सिंह के खिलाफ जेडीयू ने कार्रवाई की है। अनंत सिंह ने विधान परिषद चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ खुलकर अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाई थी। इसके बाद पार्टी के भीतर उनके रुख को लेकर सवाल उठने लगे थे। आखिरकार जेडीयू ने इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना और कार्रवाई का रास्ता अपनाया।संजय झा ने पार्टी के फैसले को लेकर एक और महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि जेडीयू में जब कोई फैसला लिया जाता है तो वह किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं होता। पार्टी में फैसले सामूहिक सहमति से लिए जाते हैं और अंतिम निर्णय नीतीश कुमार लेते हैं। ऐसे में एक बार पार्टी का फैसला हो जाने के बाद किसी नेता को यह कहने की गुंजाइश नहीं रह जाती कि उसे पार्टी का उम्मीदवार पसंद है या नहीं।


उनका सीधा सवाल था कि जब पार्टी ने अपना उम्मीदवार तय कर दिया तो फिर व्यक्तिगत पसंद या नापसंद का सवाल कहां रह जाता है? पार्टी का फैसला होने के बाद सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे उसी फैसले के साथ खड़े रहें। अगर कोई नेता इसके विपरीत जाता है तो यह सिर्फ उम्मीदवार का विरोध नहीं, बल्कि पार्टी के निर्णय का विरोध माना जाएगा। 


यही वह बिंदु है जहां अनंत सिंह का मामला जेडीयू के लिए अहम हो जाता है। अनंत सिंह की अपनी राजनीतिक पहचान और क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। मोकामा की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय से चर्चा में रहा है। यही वजह है कि उनके खिलाफ पार्टी की कार्रवाई को सामान्य संगठनात्मक कार्रवाई से ज्यादा राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।हालांकि अनंत सिंह लगातार यह कहते रहे हैं कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से है, पार्टी से नहीं। लेकिन जेडीयू नेतृत्व का संदेश अब बिल्कुल स्पष्ट नजर आ रहा है कि पार्टी के अधिकृत फैसले के बाद व्यक्तिगत राजनीतिक पसंद को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।


संजय झा ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति पार्टी लाइन के विपरीत जाकर काम करता है तो कार्रवाई होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जेडीयू की बात नहीं है। देश की कोई भी राजनीतिक पार्टी अपने संगठन और अनुशासन को बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में कार्रवाई कर सकती है।इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा संदेश यही है कि जेडीयू नेतृत्व अब संगठन के भीतर अनुशासन को लेकर कोई ढील देने के मूड में नहीं है। विधान परिषद चुनाव के दौरान सामने आई खींचतान के बाद पार्टी ने जिस तरह अनंत सिंह के खिलाफ कदम उठाया, उससे यह संकेत भी मिल रहा है कि चुनाव के बाद संगठन के भीतर पार्टी लाइन से अलग चलने वाले नेताओं को लेकर नेतृत्व सख्त रुख अपनाएगा।


संजय झा के बयान ने इस कार्रवाई को और स्पष्ट राजनीतिक संदेश दे दिया है। उन्होंने बिना किसी व्यक्ति का नाम लिए यह बता दिया कि पार्टी में कद कितना भी बड़ा हो, अंतिम फैसला संगठन का होगा और पार्टी के फैसले के खिलाफ जाने की कीमत चुकानी पड़ सकती है।अब सवाल यह है कि जेडीयू की इस सख्ती का मोकामा की राजनीति पर कितना असर पड़ेगा और अनंत सिंह आगे क्या राजनीतिक कदम उठाते हैं। फिलहाल इतना साफ है कि विधान परिषद चुनाव के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब सिर्फ एक सीट या एक उम्मीदवार की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह जेडीयू के भीतर व्यक्ति बनाम संगठन और व्यक्तिगत प्रभाव बनाम पार्टी अनुशासन की बड़ी बहस में बदलता दिखाई दे रहा है।