पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों विधानसभा से ज्यादा चर्चा विधान परिषद के चुनाव को लेकर है। खासकर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला लगातार नए राजनीतिक मोड़ ले रहा है। मैदान में जेडीयू के नीरज कुमार, राजद के दिलीप कुमार और जनसुराज के डॉ. अनुज सिंह हैं। कागज पर मुकाबला त्रिकोणीय है, लेकिन सियासी गलियारों में इसकी सबसे ज्यादा चर्चा नीरज कुमार बनाम अनुज सिंह के तौर पर हो रही है।

इस मुकाबले में सबसे बड़ा नाम है मोकामा के विधायक और जेडीयू नेता अनंत सिंह का। दिलचस्प बात यह है कि अनंत सिंह अपनी पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जनसुराज प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि पटना स्नातक सीट का चुनाव महज एमएलसी चुनाव न रहकर पुराने राजनीतिक रिश्तों, टकराव और व्यक्तिगत समीकरणों का अखाड़ा बनता जा रहा है।

अब इस कहानी में एक ऐसा ट्विस्ट आया है, जिसने पूरे समीकरण को और दिलचस्प बना दिया है। जनसुराज नेता पियूष प्रियदर्शी ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके बजाय उन्होंने जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार के पक्ष में अपना रुख सार्वजनिक किया है।

यानी जिस पियूष ने विधानसभा चुनाव में जेडीयू उम्मीदवार के खिलाफ मैदान संभाला था, वही अब एमएलसी चुनाव में जेडीयू के नीरज कुमार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण अनंत सिंह के साथ उनका पुराना राजनीतिक टकराव बताया जा रहा है।

अनंत के विरोधी पियूष ने बदला चुनावी समीकरण

पियूष प्रियदर्शी मोकामा विधानसभा चुनाव में जनसुराज के टिकट पर अनंत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। चुनावी मैदान में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन दोनों के बीच राजनीतिक दूरी बनी रही। विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच टकराव और बाद में दुलारचंद यादव हत्याकांड ने इस राजनीतिक संघर्ष को और गंभीर बना दिया।

पियूष ने अब पटना स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर अपना रुख सार्वजनिक किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अनंत सिंह समर्थित जनसुराज प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन नहीं कर रहे हैं।  पियूष का कहना है कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक सिद्धांत और नैतिक प्रतिबद्धता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने अपने पोस्ट में दुलारचंद यादव हत्याकांड का भी जिक्र किया और कहा कि इस मामले को लेकर उनकी कानूनी लड़ाई जारी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके काफिले पर हुए हमले और उसके बाद की घटनाओं में अनंत सिंह और उनके सहयोगियों की भूमिका को लेकर उनकी ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पियूष ने यह भी कहा कि इस घटनाक्रम में उनके सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज हुए और कई लोगों को जेल जाना पड़ा।

पियूष का सवाल- बाहुबल के सहारे शिक्षित समाज का प्रतिनिधित्व कैसे?

अपने बयान में पियूष ने पटना स्नातक एमएलसी चुनाव की प्रकृति को भी मुद्दा बनाया। उनका कहना है कि यह चुनाव शिक्षित युवाओं और स्नातक मतदाताओं का चुनाव है। ऐसे में यदि कोई प्रत्याशी अपराध और बाहुबल की राजनीति के सहारे चुनाव लड़ता है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि वह शिक्षित समाज का प्रतिनिधित्व कैसे करेगा।

पियूष ने कहा कि उनके लिए राजनीतिक लाभ से ज्यादा महत्वपूर्ण नैतिकता है और इसी वजह से वह ऐसे राजनीतिक समीकरण का हिस्सा नहीं बन सकते, जिसे वह अपनी प्रतिबद्धताओं के खिलाफ मानते हैं।उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में रहें या नहीं रहें, भविष्य में भी वह उन लोगों या तत्वों के साथ समझौता नहीं करेंगे, जिनके साथ खड़ा होना उनकी नैतिक प्रतिबद्धताओं के विपरीत हो।यही बयान अब पटना स्नातक सीट के चुनावी समीकरण में चर्चा का बड़ा कारण बन गया है।

एक तरफ अनंत, दूसरी तरफ पियूष

अब तस्वीर कुछ ऐसी बनती दिखाई दे रही है कि अनंत सिंह डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में हैं, जबकि अनंत के पुराने राजनीतिक विरोधी पियूष प्रियदर्शी नीरज कुमार के पक्ष में खड़े हैं।यही टकराव इस चुनाव को खास बना रहा है।नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच पुराना राजनीतिक विवाद किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में अनंत सिंह का अपनी पार्टी के उम्मीदवार से अलग जाकर जनसुराज प्रत्याशी का समर्थन करना पहले ही चर्चा का विषय बना हुआ था। अब पियूष के नीरज कुमार के पक्ष में आने से यह मुकाबला और पेचीदा हो गया है।

जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी इस पूरे घटनाक्रम पर संगठन की नजर होने की बात कह चुके हैं। पार्टी की तरफ से यह संकेत दिया गया है कि मामले को संगठन के स्तर पर देखा जा रहा है और इसे सुलझाने की कोशिश होगी। हालांकि, अनंत सिंह के रुख के बाद यह मामला कितनी जल्दी सुलझता है, यह देखने वाली बात होगी।

88 हजार वोटर, तीन जिले और 26 विधानसभा क्षेत्र

पटना स्नातक विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र का दायरा भी काफी बड़ा है। इसमें पटना, नालंदा और नवादा जिले शामिल हैं। कुल 26 विधानसभा क्षेत्र इस निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा हैं।इनमें पटना के 14, नालंदा के 7 और नवादा के 5 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इस बार करीब 88 हजार स्नातक मतदाता चुनावी मैदान में निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं।यही वजह है कि राजनीतिक दल इस सीट को सिर्फ एक विधान परिषद सीट के तौर पर नहीं देख रहे हैं। यहां का परिणाम संबंधित दलों के संगठनात्मक प्रभाव और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत दे सकता है।

जातीय समीकरण भी बन सकता है अहम फैक्टर

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में वोट जाति के आधार पर सीधे बंटता हो, ऐसा कहना आसान नहीं है। फिर भी उम्मीदवारों के समर्थक अपने-अपने स्तर पर सामाजिक समीकरणों का आकलन कर रहे हैं।नीरज कुमार के करीबियों के मुताबिक, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के करीब 25 हजार मतदाता होने का अनुमान है। लव-कुश समूह से जुड़े करीब 15 हजार मतदाताओं का भी दावा किया जा रहा है। भूमिहार मतदाताओं की संख्या करीब 15 हजार बताई जा रही है।

इसके अलावा ब्राह्मण और राजपूत मतदाताओं की संख्या 10 हजार से अधिक होने का अनुमान समर्थकों की ओर से लगाया जा रहा है। दलित मतदाताओं की संख्या भी 5 हजार से अधिक बताई जा रही है। हालांकि, ये आंकड़े राजनीतिक आकलन हैं और अंतिम परिणाम में इनका प्रभाव किस रूप में दिखाई देगा, यह मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।

असली लड़ाई अब किसकी?

पटना स्नातक सीट पर राजद के नीरज पटेल भी मैदान में हैं। लेकिन जिस तरह अनंत सिंह और पियूष प्रियदर्शी का एंगल सामने आया है, उसने चुनाव की चर्चा को मुख्य रूप से नीरज कुमार और डॉ. अनुज सिंह के बीच केंद्रित कर दिया है।एक तरफ अनंत सिंह की राजनीतिक ताकत और उनका समर्थन अनुज सिंह के साथ दिखाई दे रहा है। दूसरी तरफ पियूष प्रियदर्शी ने नीरज कुमार के समर्थन का ऐलान कर दिया है।यानी चुनावी मैदान में उम्मीदवार तीन हैं, लेकिन पर्दे के पीछे चल रही राजनीतिक कहानी कई किरदारों वाली हो गई है।सबसे दिलचस्प सवाल यही है कि क्या अनंत सिंह का समर्थन अनुज सिंह के लिए निर्णायक साबित होगा या पियूष प्रियदर्शी का खुलकर नीरज कुमार के साथ आना जेडीयू उम्मीदवार के समीकरण को प्रभावित करेगा? फिलहाल इतना तय है कि पटना स्नातक एमएलसी चुनाव अब सिर्फ वोटों की लड़ाई नहीं रह गया है। यह पुराने राजनीतिक विवाद, नए गठजोड़ और बदलते समीकरणों की ऐसी कहानी बन चुका है, जिसमें हर नए बयान के साथ चुनावी पेंच और कसता जा रहा है।और इस कहानी की सबसे चर्चित तस्वीर फिलहाल यही है—अनंत सिंह अपने ही दल के उम्मीदवार से अलग खड़े हैं, जबकि उनके पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पियूष प्रियदर्शी ने जेडीयू के नीरज कुमार के पक्ष में अपना रुख साफ कर दिया है।