Anant Singh : बिहार विधान परिषद चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, पटना स्नातक सीट का सियासी मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प होता जा रहा है। चुनाव प्रचार के बीच जेडीयू विधायक और ‘छोटे सरकार’ के नाम से चर्चित अनंत सिंह लगातार अपने अंदाज में बयान दे रहे हैं। अब उन्होंने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिसने पटना स्नातक सीट के चुनावी माहौल को गरमा दिया है। अनंत सिंह ने सीधे-सीधे दावा किया कि 23 तारीख को “गैस निकाल देंगे” और इसके लिए ही वे मैदान में उतर रहे हैं।

अनंत सिंह के इस बयान को चुनावी चुनौती के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, पटना स्नातक सीट पर एनडीए के जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार के सामने अलग-अलग खेमों के उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में जब अनंत सिंह से पूछा गया कि उन्हें लगातार चुनौती दी जा रही है, तो उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया।

अनंत सिंह ने कहा कि अगर कोई चुनौती दे रहा है तो वे क्या करें, उसे काट दें क्या? उनका कहना था कि किसी के चुनौती देने या न देने से उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके चुनाव प्रचार करने या नहीं करने से भी किसी को फर्क पड़े या न पड़े, लेकिन 21 तारीख को वह अपना काम कर देंगे। उनका सबसे ज्यादा चर्चा में आने वाला बयान रहा—“पुदीना हम हैं न! पुदीना निकालेंगे कुल 23 तारीख को उसी के लिए जा रहे हैं। गैस कुल बाहर कर देंगे। बहुत गैस हो गया है। अब गैस कुल निकाल देंगे।”

अनंत सिंह की भाषा भले ही राजनीतिक मुहावरे और तंज से भरी हो, लेकिन संदेश साफ है। वह अपने समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में चुनावी ताकत दिखाने और विरोधियों को जवाब देने के मूड में हैं। “गैस निकाल देंगे” वाला उनका बयान अब चुनावी चर्चा का नया मुद्दा बन गया है। राजनीतिक हलकों में इसे विरोधियों के दावों और चुनावी हवा बनाने की कोशिशों पर उनका तंज माना जा रहा है।

चुनौती की बात पर अनंत का बेबाक जवाब

जब उनसे पूछा गया कि उन्हें लगातार चैलेंज किया जा रहा है और विरोधी उन्हें चुनौती दे रहे हैं, तो अनंत सिंह ने सवाल के जवाब में ही सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई चैलेंज कर रहा है तो क्या करें, उसे काट दें क्या? इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी के चैलेंज से कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

अनंत सिंह का दावा है कि असली जवाब चुनाव के मैदान में मिलेगा। यानी बयानबाजी चाहे जितनी हो, अंतिम फैसला मतदाता करेंगे। उनके मुताबिक 23 तारीख को होने वाली वोटिंग ही बताएगी कि किसका दावा कितना मजबूत है।उनके बयान में एक और दिलचस्प बात थी। उन्होंने कहा कि वह 23 तारीख को “गैस निकालने” के लिए जा रहे हैं। इसे उनके समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोटरों को लामबंद करने और चुनावी मुकाबले को एकतरफा करने के दावे के तौर पर देखा जा रहा है।

भीड़ को बताया अपनी ताकत का सबूत

जब अनंत सिंह से चुनाव को लेकर मिल रहे फीडबैक के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने किसी सर्वे, आंकड़े या राजनीतिक रिपोर्ट का हवाला देने के बजाय सीधे अपनी सभाओं और कार्यक्रमों में जुट रही भीड़ की ओर इशारा किया।उन्होंने कहा कि आपको क्या लगता है? आपको दिखाई नहीं देता? आपके पास आंख नहीं है क्या? उनके मुताबिक आज कोई बोर्ड थोड़ी लग रहा है कि किसके साथ कितने लोग हैं। जब उनके साथ भीड़ दिखाई दे रही है तो साफ है कि उनके पास समर्थकों की संख्या ज्यादा है।

अनंत सिंह का यह बयान भी काफी महत्वपूर्ण है। दरअसल, चुनावी मौसम में हर उम्मीदवार और उसके समर्थक अपनी स्थिति मजबूत बताने की कोशिश करते हैं। लेकिन अनंत सिंह ने अपने पक्ष में माहौल का दावा करने के लिए सीधे सड़क और मैदान में दिख रही भीड़ को आधार बनाया।

उनका तर्क है कि जनता और समर्थकों की मौजूदगी किसी भी राजनीतिक दावे का सबसे बड़ा संकेत है। वह यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कागज पर समीकरण कुछ भी हों, लेकिन जमीन पर उनके साथ खड़े लोगों की संख्या काफी कुछ कह रही है।

पटना स्नातक सीट पर क्यों बढ़ा तनाव?

पटना स्नातक सीट इस बार शुरुआत से ही हाईप्रोफाइल मुकाबले का केंद्र बनी हुई है। इस सीट में पटना, नालंदा और नवादा जिले आते हैं। चुनावी मैदान में जेडीयू के नीरज कुमार के अलावा कई राजनीतिक धाराओं से जुड़े उम्मीदवार मुकाबले में हैं। ऐसे में हर नेता अपने प्रभाव क्षेत्र को चुनावी नतीजे में बदलने की कोशिश कर रहा है।

सबसे ज्यादा चर्चा अनंत सिंह के रुख को लेकर है। अनंत सिंह जेडीयू के विधायक हैं, लेकिन इस चुनाव में उन्होंने जिस तरह अपनी पसंद के उम्मीदवार के समर्थन में सक्रियता दिखाई है, उससे मुकाबले का सियासी गणित दिलचस्प हो गया है।अनंत सिंह का दावा है कि उन्हें चुनौती देने वालों को जवाब जनता देगी। उनका फोकस अपने समर्थकों को एकजुट करने और वोटरों तक यह संदेश पहुंचाने पर है कि चुनावी मुकाबले में उनकी ताकत को कम करके नहीं आंका जा सकता।

23अक्टूबर को होगा असली इम्तिहान

अब नजर 23 अक्टूबर पर टिक गई है। अनंत सिंह जिस आत्मविश्वास के साथ 21 तारीख का जिक्र कर रहे हैं, उसका असली परीक्षण मतदान के दिन होगा। उनकी सभाओं में जुट रही भीड़ क्या वोट में बदलती है? समर्थकों का उत्साह क्या बूथ तक पहुंचता है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या अनंत सिंह का दावा चुनावी नतीजों में दिखाई देगा?इन तमाम सवालों का जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में है।हालांकि अनंत सिंह ने अपने अंदाज में यह जरूर साफ कर दिया है कि वह इस मुकाबले को केवल एक सामान्य चुनाव की तरह नहीं देख रहे हैं। उनके बयान में चुनौती का जवाब भी है, आत्मविश्वास भी और विरोधियों के लिए तंज भी।

अब चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में जैसे-जैसे सरगर्मी बढ़ेगी, वैसे-वैसे नेताओं के बयान और ज्यादा तीखे होने की उम्मीद है। लेकिन अनंत सिंह ने जिस अंदाज में कहा है—“21 तारीख को गैस निकाल देंगे”—उसने पटना स्नातक सीट के मुकाबले को एक नया चुनावी मुहावरा जरूर दे दिया है।

आखिरकार 21 अक्टूबर को मतदाता ही तय करेंगे कि मैदान में किसकी हवा थी और किसका दावा। अभी अनंत सिंह को अपनी भीड़ पर भरोसा है, विरोधियों को अपने समीकरणों पर। मुकाबला दिलचस्प है और इसका फैसला वोटों की गिनती के बाद ही सामने आएगा।