पटना: बिहार की सियासत में मोकामा से शुरू हुआ अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार विवाद अब सिर्फ दो नेताओं की आपसी खींचतान तक सीमित नहीं रह गया है। पटना स्नातक सीट से विधान परिषद चुनाव को लेकर जेडीयू के भीतर बन रही स्थिति ने पार्टी के बड़े नेताओं की भूमिका को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। खासकर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की चुप्पी और पूरे मामले में उनकी संभावित भूमिका को लेकर सियासी अटकलें तेज हो गई हैं।
इस बीच कल्याणपुर दौरे पर पहुंचे जेडीयू के वरिष्ठ नेता और एमएलसी नीरज कुमार ने अनंत सिंह को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने इस विवाद में आगे की तस्वीर को लेकर नए संकेत दे दिए हैं। नीरज कुमार ने साफ कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं है और पार्टी जब कोई निर्णय लेगी, तो सभी को उसे मानना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभी बड़े स्तर की बैठक होनी बाकी है और उसके बाद इस मुद्दे पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
नीरज कुमार के इस बयान को अब सिर्फ पार्टी अनुशासन की बात नहीं, बल्कि मोकामा विवाद को सुलझाने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की संभावित सक्रियता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में ललन सिंह इस पूरे मामले में मोर्चा संभाल सकते हैं?
नीरज के बयान में छिपा बड़ा सियासी संकेत
कल्याणपुर में जब नीरज कुमार से अनंत सिंह के साथ चल रहे विवाद को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने व्यक्तिगत बयान देने के बजाय पूरा मामला पार्टी के फैसले से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं है और पार्टी का निर्णय सभी को मानना होगा। सबसे अहम बात यह रही कि नीरज ने यह भी कहा कि अभी बड़े स्तर की बैठक बाकी है। यानी फिलहाल मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और पार्टी के स्तर पर इस पर मंथन होना बाकी है।
यही बयान अब राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है। क्योंकि अगर मामला सिर्फ नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच का होता तो पार्टी की ओर से पहले ही कोई स्पष्ट संदेश आ सकता था। लेकिन बड़े स्तर की बैठक की बात सामने आने के बाद माना जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस विवाद को सुलझाने के लिए आगे आ सकते हैं।
अनंत सिंह ने नीरज के खिलाफ खोला मोर्चा
दरअसल, विवाद की जड़ विधानसभा चुनाव से पहले के उस बयान में है, जिसे अनंत सिंह अब तक नहीं भूले हैं। चुनाव से ठीक पहले नीरज कुमार ने मोकामा को लेकर कहा था कि “अब मोकामा के तकदीर पर टेटन लग गया है।” नीरज कुमार ने उस समय अनंत सिंह का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया था, लेकिन उनके बयान को राजनीतिक तौर पर अनंत सिंह से जोड़कर देखा गया। अनंत सिंह ने बाद में विधानसभा चुनाव जीत लिया, लेकिन माना जा रहा है कि नीरज का वह बयान उनके जेहन में बना रहा।
अब जब पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार का नाम जेडीयू उम्मीदवार के तौर पर लगभग तय माना जा रहा है, तो वही पुराना विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। अनंत सिंह ने नीरज कुमार के मुकाबले अनुज सिंह को समर्थन देकर अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट कर दी है। इससे जेडीयू के सामने भी एक मुश्किल पैदा हो गई है, क्योंकि मोकामा में अनंत सिंह का प्रभाव पार्टी के लिए नजरअंदाज करना आसान नहीं है।
जेडीयू दफ्तर में हुई पैचअप की कोशिश, लेकिन नहीं बनी बात
विवाद को खत्म करने के लिए जेडीयू कार्यालय में दोनों नेताओं के बीच सुलह की कोशिश भी की गई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में दोनों को आमने-सामने लाने का प्रयास हुआ। बैठक के बाद नीरज कुमार ने संकेत दिया कि सबकुछ ठीक है। लेकिन अनंत सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर कोई सकारात्मक बयान नहीं दिया और चुपचाप पार्टी कार्यालय से निकल गए।यहीं से यह सवाल और बड़ा हो गया कि आखिर पार्टी इस विवाद को कैसे खत्म करेगी?क्योंकि एक तरफ पार्टी नेतृत्व नीरज कुमार को पटना स्नातक सीट से आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ अनंत सिंह खुलकर उनके विरोध में खड़े नजर आ रहे हैं।
अब ललन सिंह की भूमिका पर नजर
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की भूमिका को लेकर है। ललन सिंह मोकामा और आसपास की राजनीति को करीब से समझते हैं इसी इलाके के सांसद भी है और अनंत सिंह के साथ उनके राजनीतिक समीकरण भी बिहार की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। फिलहाल ललन सिंह ने इस विवाद पर खुलकर कोई बयान नहीं दिया है। लेकिन नीरज कुमार का यह कहना कि “अभी बड़े स्तर की बैठक बाकी है”, राजनीतिक तौर पर कई सवाल खड़े करता है।
क्या पार्टी की अगली बैठक में इस मुद्दे पर कोई बड़ा फैसला होगा? क्या ललन सिंह को अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद खत्म कराने की जिम्मेदारी दी जाएगी? या फिर पार्टी दोनों नेताओं को संगठन के फैसले के साथ चलने का स्पष्ट संदेश देगी? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिल सकता है।
‘पार्टी से बड़ा कोई नहीं’... क्या अनंत सिंह को संदेश?
नीरज कुमार के बयान का एक दूसरा पहलू भी है। उन्होंने सीधे तौर पर अनंत सिंह पर हमला नहीं किया, बल्कि कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं है। राजनीतिक जानकार इसे अनंत सिंह के लिए अप्रत्यक्ष संदेश के तौर पर भी देख रहे हैं।यानी उम्मीदवार का फैसला अगर पार्टी करती है तो सभी नेताओं को उसका समर्थन करना होगा। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर हैं कि अनंत सिंह पार्टी के फैसले को किस तरह लेते हैं।
दूसरी तरफ, अगर पार्टी नेतृत्व नीरज कुमार के पक्ष में अंतिम फैसला करता है तो मोकामा में अनंत सिंह को साथ लाना जेडीयू के लिए बड़ी चुनौती होगी। वहीं, अगर विवाद बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ पटना स्नातक सीट तक सीमित रहने की बजाय पार्टी के अंदर के समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल नीरज कुमार ने गेंद पार्टी के पाले में डाल दी है। “बड़े स्तर की बैठक बाकी है” वाला उनका बयान इस बात का संकेत दे रहा है कि मोकामा के इस विवाद पर अभी अंतिम अध्याय लिखा नहीं गया है। अब देखना होगा कि अगली बैठक में कौन सा फॉर्मूला निकलता है और क्या केंद्रीय मंत्री ललन सिंह इस पूरे मामले को सुलझाने के लिए सक्रिय भूमिका में सामने आते हैं।