Anant Singh : बिहार की सियासत में मोकामा विधायक अनंत सिंह इन दिनों कई मुश्किलों से घिरे हुए हैं। एक तरफ जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, तो दूसरी तरफ दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी कानूनी मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। इन सबके बीच अब उनके पैतृक गांव नदवां में उनकी सलामती और परिवार पर आई विपत्ति को दूर करने के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान किया जा रहा है। गांव में अखंड रामचरितमानस का पाठ हो रहा है। इसके साथ ही 108 लोग बारी-बारी से सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं। गांव के लोगों की मानें तो अनंत सिंह पर आया संकट सिर्फ उनका निजी संकट नहीं, बल्कि पूरे गांव की चिंता है।


नदवां गांव में शनिवार से शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन लगातार चल रहा है। गांव के लोग पूरी श्रद्धा के साथ अखंड रामचरितमानस का पाठ कर रहे हैं। वहीं, 108 लोग बारी-बारी से सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं। इस दौरान भगवान से प्रार्थना की जा रही है कि अनंत सिंह और उनके परिवार पर आई परेशानियां जल्द दूर हों और उनके जीवन में फिर से सुख-शांति लौटे।


इस आयोजन का समापन 10 नवंबर को होगा। अंतिम दिन पूजा-पाठ के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा। खास बात यह है कि चार दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में पाठ करने वाले लोगों के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए भी प्रतिदिन भंडारे की व्यवस्था की गई है। गांव में धार्मिक माहौल बना हुआ है और बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं।


'अनंत सिंह पर आई विपत्ति पूरे गांव की परेशानी है'

नदवां गांव के लोगों का कहना है कि अनंत सिंह के साथ उनका रिश्ता सिर्फ एक जनप्रतिनिधि का नहीं, बल्कि गांव और परिवार जैसा है। यही वजह है कि जब वह मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, तो ग्रामीण भी उनके लिए एकजुट होकर प्रार्थना कर रहे हैं।


ग्रामीण रमाशंकर सिंह ने कहा कि विधायक अनंत सिंह पर आई विपत्ति पूरे गांव के लिए परेशानी की बात है। उनके कल्याण और संकटों को दूर करने के उद्देश्य से अखंड रामचरितमानस और सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि भगवान की कृपा से उनकी परेशानियां दूर होंगी।वहीं, ग्रामीण रामकुमार ने कहा कि यह आयोजन नदवां गांव के कल्याण के लिए भी किया जा रहा है। अनंत सिंह पर आए संकट के समय गांव के सभी लोग एकजुट हैं। इसी भावना के साथ धार्मिक अनुष्ठान रखा गया है।


आखिर क्यों मुश्किलों में घिरे हैं अनंत सिंह?

मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें पिछले कुछ दिनों में लगातार बढ़ी हैं। बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान उन्होंने अपनी ही पार्टी जेडीयू के राजनीतिक समीकरण से अलग रास्ता अपनाया था। उन्होंने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह का समर्थन किया था, जबकि इस सीट पर जेडीयू के वरिष्ठ नेता और प्रत्याशी नीरज कुमार मैदान में थे।


अनंत सिंह के इस कदम को पार्टी नेतृत्व ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि के तौर पर देखा। चुनाव के दौरान उनके बयान और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कथित अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल ने भी विवाद को बढ़ाया। चुनाव परिणाम में जन सुराज के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद जेडीयू ने अनंत सिंह के खिलाफ कड़ा फैसला लिया।


छह साल के लिए JDU से निष्कासन, पत्नी नीलम देवी पर भी कार्रवाई

जेडीयू ने अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की ओर से इस संबंध में कार्यालय आदेश जारी किया गया था। पार्टी ने केवल अनंत सिंह पर ही कार्रवाई नहीं की, बल्कि उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। 


पार्टी का आरोप था कि दोनों पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। इसके अलावा बाढ़ के जिला अध्यक्ष मयंक राज को भी तत्काल प्रभाव से पद से मुक्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद अनंत सिंह की राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ गईं। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से उनकी विधानसभा सदस्यता के मामले में भी आवश्यक कार्रवाई करने की अनुशंसा की है। ऐसे में अब उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।


दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

अनंत सिंह की परेशानियों की दूसरी बड़ी वजह दुलारचंद यादव हत्याकांड है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत से जुड़े आदेश पर हस्तक्षेप किया है। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट की ओर से 19 मार्च 2026 को दिए गए जमानत आदेश को अगली सुनवाई तक निलंबित कर दिया है।


सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को 4 दिसंबर 2026 तक या उससे पहले संबंधित जांच अधिकारी के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इससे पहले सरेंडर की समयसीमा 1 दिसंबर तक होने की बात सामने आई थी, लेकिन ताजा आदेश में इसे बढ़ाकर 4 दिसंबर कर दिया गया।


सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमानत देते समय अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या और आरोपों की गंभीरता पर समुचित विचार नहीं किया गया। अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जोड़कर किस आधार पर देखा गया।


राजनीतिक और कानूनी संकट के बीच गांव में पूजा-पाठ

एक तरफ अनंत सिंह की राजनीतिक मुश्किलें हैं, तो दूसरी तरफ दुलारचंद यादव हत्याकांड में कानूनी प्रक्रिया का दबाव है। इन परिस्थितियों के बीच नदवां गांव में हो रहा अखंड रामचरितमानस और सुंदरकांड का पाठ चर्चा का विषय बन गया है।गांव के लोग अपने विधायक और उनके परिवार की सलामती के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। 108 लोगों के सुंदरकांड पाठ से लेकर रोजाना भंडारे तक, इस आयोजन में ग्रामीणों की भागीदारी दिखाई दे रही है।


अब सभी की नजरें 10 नवंबर पर टिकी हैं, जब इस धार्मिक अनुष्ठान का समापन होगा। हालांकि, अनंत सिंह की राजनीतिक और कानूनी मुश्किलों का समाधान धार्मिक आयोजन से अलग कानूनी और राजनीतिक प्रक्रियाओं के जरिए ही तय होगा। फिलहाल नदवां गांव में एक ही प्रार्थना गूंज रही है कि अनंत सिंह और उनके परिवार पर आया संकट जल्द दूर हो।