पटना : मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता पर तलवार लटक रही है। जेडीयू ने उनकी विधायकी समाप्त करने की अनुशंसा कर रखी है और विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जवाब मांगने के लिए नोटिस भी जारी किया जा चुका है। इस बीच अनंत सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार से मुलाकात कर बिहार की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। खास बात यह रही कि इस मुलाकात में राजनीतिक मुद्दों के साथ परिवार का एक खास निमंत्रण भी शामिल था।
दरअसल, जेडीयू विधायक अनंत सिंह आज विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार से मिलने उनके आवास पहुंचे। दोनों के बीच करीब 10 मिनट से अधिक समय तक बातचीत हुई। इस दौरान अनंत सिंह ने अपनी छोटी बेटी की शादी का निमंत्रण पत्र स्पीकर को सौंपा और उन्हें समारोह में शामिल होने का न्योता दिया। हालांकि, इस मुलाकात में सिर्फ शादी की चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि कई अन्य मुद्दों पर भी बातचीत हुई।
मुलाकात के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि क्या विधानसभा अध्यक्ष अनंत सिंह की बेटी की शादी में शामिल होंगे? जब मीडिया ने प्रेम कुमार से इस संबंध में सवाल पूछा तो उन्होंने अपने अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जहां से निमंत्रण आता है, वहां वे जाते हैं। पक्ष हो या विपक्ष, दोनों के कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। किसी के यहां जाने से उन्हें कोई परहेज नहीं है।
स्पीकर के इस जवाब के बाद राजनीतिक गलियारों में मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक तरफ अनंत सिंह की विधायकी पर फैसला होना बाकी है, तो दूसरी तरफ उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को पारिवारिक समारोह का निमंत्रण देकर व्यक्तिगत संबंधों की एक अलग तस्वीर भी पेश की है। आखिर क्यों खतरे में पड़ी अनंत सिंह की विधायकी?
अनंत सिंह और जेडीयू के बीच विवाद की शुरुआत विधान परिषद चुनाव के दौरान हुई थी। पार्टी का आरोप है कि मोकामा विधायक ने एमएलसी चुनाव में जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम किया। इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ मानते हुए जेडीयू ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
इसी मामले में जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने 26 अक्टूबर को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को पत्र सौंपा था। इस पत्र में अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा की गई थी। पार्टी की ओर से अपनी मांग के समर्थन में करीब 10 पन्नों के दस्तावेजी सबूत और वीडियो भी सौंपे गए थे। जेडीयू का तर्क है कि पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम करना अनुशासनहीनता है और इस मामले में अनंत सिंह की विधायकी पर कार्रवाई होनी चाहिए।
जेडीयू की शिकायत मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने मामले को आगे बढ़ाते हुए अनंत सिंह को नोटिस जारी किया। विधानसभा सचिवालय की ओर से उन्हें सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। अब इस मामले में अनंत सिंह का जवाब और उपलब्ध कराए गए दस्तावेज आगे की कार्रवाई के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं। यानी फिलहाल अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। विधानसभा अध्यक्ष के सामने पूरा मामला विचाराधीन है और आगे की प्रक्रिया उनके जवाब के आधार पर तय होगी।
अनंत सिंह की इस मुलाकात को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह ऐसे समय हुई है जब उनकी राजनीतिक सदस्यता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा है। एक तरफ जेडीयू उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है, तो दूसरी तरफ अनंत सिंह सीधे विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर रहे हैं। हालांकि, इस मुलाकात में विधायकी से जुड़े मामले पर क्या चर्चा हुई और स्पीकर ने अनंत सिंह के पक्ष को लेकर क्या रुख अपनाया, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
फिलहाल इतना तय है कि अनंत सिंह की बेटी की शादी का निमंत्रण और उनकी विधायकी का मामला, दोनों ही बिहार की सियासत में चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष के सामने अनंत सिंह अपना क्या पक्ष रखते हैं और उनकी विधायकी को लेकर आगे क्या फैसला होता है।