Bihar Politics : बिहार की राजनीति में इन दिनों जदयू विधायक अनंत सिंह की लगातार हो रही मुलाकातों ने नई सियासी चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मोकामा विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित जदयू विधायक अनंत सिंह ने रविवार को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से मुलाकात की। ललन सिंह के आवास पर हुई इस मुलाकात को फिलहाल शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और अनंत सिंह के हालिया बयानों के बीच इस मुलाकात को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


अनंत सिंह की केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से यह मुलाकात इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की थी। 20 अगस्त को हुई इस मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिनमें नीतीश कुमार अनंत सिंह को अपने आवास के बाहर तक छोड़ने आते दिखाई दिए थे। दोनों नेताओं की मुलाकात और आत्मीयता ने उस समय भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया था।


अनंत सिंह और नीतीश कुमार के संबंध लंबे समय से व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तर पर रहे हैं। अनंत सिंह को नीतीश कुमार का पुराना सहयोगी माना जाता रहा है। जब नीतीश कुमार बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हुआ करते थे, तभी से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक नजदीकियां रही हैं। यही वजह है कि दोनों नेताओं की हालिया मुलाकात को केवल सामान्य शिष्टाचार भेंट के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।


अब नीतीश कुमार से मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद अनंत सिंह का ललन सिंह से मिलना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, मुलाकात के दौरान क्या बातचीत हुई, इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन बिहार की राजनीति में बदलते समीकरणों और अनंत सिंह की राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं।


दरअसल, हाल के दिनों में अनंत सिंह के कई बयान राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में रहे हैं। बांकीपुर विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद उनका एक बयान सुर्खियों में आया था। अनंत सिंह ने कहा था कि बिहार के लोगों के बीच यह संदेश गया है कि नीतीश कुमार को जबरदस्ती मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई थी।


अनंत सिंह का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि वह जदयू के विधायक हैं और लंबे समय से नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में गिने जाते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके बयान को उस समय बिहार के बदलते सत्ता समीकरणों से जोड़कर देखा था। हालांकि, अनंत सिंह ने अपने बयानों के जरिए अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक राय रखी, लेकिन इससे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर चर्चा जरूर तेज हो गई थी।


इससे पहले अनंत सिंह राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर भी चिंता जता चुके हैं। उनके बयानों ने बिहार सरकार के सामने राजनीतिक असहजता की स्थिति पैदा की थी। ऐसे समय में उनका लगातार राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नेताओं से मिलना सियासी गलियारों में दिलचस्पी का विषय बना हुआ है।


ललन सिंह और अनंत सिंह के बीच भी पुराने राजनीतिक संबंध रहे हैं। दोनों लंबे समय से बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और जदयू के राजनीतिक सफर से जुड़े रहे हैं। ऐसे में रविवार को हुई मुलाकात को पुराने संबंधों की निरंतरता के तौर पर भी देखा जा सकता है। हालांकि, नीतीश कुमार से मुलाकात के तुरंत बाद ललन सिंह से भेंट ने राजनीतिक अटकलों को और मजबूत कर दिया है।


अनंत सिंह का राजनीतिक सफर भी बिहार की राजनीति में काफी चर्चित रहा है। वर्ष 2005 में वह पहली बार जदयू के टिकट पर मोकामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद से उन्होंने मोकामा और आसपास के इलाकों में अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई। मोकामा क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं में उनकी गिनती होती रही है और उनका जनाधार आज भी बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय रहता है।


मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह का प्रभाव लंबे समय से कायम रहा है। कई उतार-चढ़ाव और राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद उनकी सक्रियता लगातार बनी रही है। यही कारण है कि उनके बयान और राजनीतिक मुलाकातें अक्सर सुर्खियों में आ जाती हैं।


फिलहाल, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और अनंत सिंह की इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है। लेकिन बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इसे सामान्य मुलाकात मानने के बजाय राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। खासकर 20 अगस्त को नीतीश कुमार से मुलाकात और उसके बाद ललन सिंह से भेंट ने यह साफ कर दिया है कि अनंत सिंह की राजनीतिक सक्रियता आने वाले दिनों में भी बिहार की सियासत में चर्चा का विषय बनी रह सकती है।