DESK: मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बिहार विधानसभा सचिवालय ने उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग को लेकर नोटिस जारी किया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के निर्देश पर जारी इस नोटिस में अनंत सिंह से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
दरअसल, जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अनंत सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उनकी विधायकी रद्द करने की मांग की है। पार्टी की शिकायत के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।
जेडीयू का आरोप है कि अनंत सिंह ने विधान परिषद चुनाव में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ जाकर जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया था। इसके अलावा उन पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया गया है।
इन आरोपों के बाद जेडीयू ने 24 अक्टूबर 2026 को अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर दलबदल कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के मुताबिक, अनंत सिंह सात दिनों के भीतर अपना जवाब लिखित रूप में दे सकते हैं या व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं। उनका जवाब मिलने और जेडीयू की ओर से पेश किए गए सबूतों की समीक्षा के बाद ही उनकी विधायकी पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
वहीं, अनंत सिंह की मुश्किलें सिर्फ विधायकी तक सीमित नहीं हैं। हाल ही में उनकी पत्नी नीलम देवी से राज्य मंत्री का दर्जा वापस ले लिया गया और उन्हें सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस भी दिया गया है। इसके अलावा दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का आदेश दिया है।
अब सबकी नजरें अनंत सिंह के जवाब और विधानसभा अध्यक्ष के अगले फैसले पर टिकी हैं।