पटना: बिहार की सियासत में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं है। सत्ता के गलियारों में बयानबाजी और राजनीतिक समीकरणों के बीच मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने नई चर्चा छेड़ दी है। सवाल उठने लगा है कि क्या बिहार में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन होने वाला है? क्या मौजूदा सरकार के दिन गिनने शुरू हो गए हैं? और सबसे बड़ा सवाल यह कि अगर सरकार बदली तो क्या तेजस्वी यादव की सत्ता में वापसी का रास्ता खुलेगा या उनका इंतजार और लंबा होने वाला है?

दरअसल, शुक्रवार को पटना से प्रयागराज के लिए निकले अनंत सिंह का आरा, बक्सर समेत कई जगहों पर जोरदार स्वागत किया गया। उनके काफिले में 100 से अधिक गाड़ियां शामिल थीं। सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतार, समर्थकों की भीड़ और जगह-जगह फूल-मालाओं से स्वागत को देखकर यह किसी सामान्य यात्रा से ज्यादा शक्ति प्रदर्शन जैसा नजर आया। हालांकि, अनंत सिंह ने अपनी इस यात्रा को पुराने दोस्त के घर शादी समारोह में शामिल होने का कार्यक्रम बताया।

पटना से निकलते वक्त उन्होंने कहा कि वह अपने पुराने मित्र पप्पू सलमान के बेटे के शादी समारोह में शामिल होने प्रयागराज जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके दोस्त बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश में हैं और उनके समर्थकों की संख्या भी काफी है। लेकिन आरा पहुंचते-पहुंचते उनके एक बयान ने इस यात्रा को राजनीतिक रंग दे दिया।

'सरकार बदलेगी तो काम होगा', अनंत सिंह के बयान से मची हलचल

आरा में स्वागत के दौरान स्थानीय लोगों ने उनसे इलाके के विकास और मंत्रियों के कामकाज को लेकर शिकायत की। लोगों का कहना था कि मंत्री क्षेत्र में काम नहीं करते हैं। इस पर अनंत सिंह ने बेहद संक्षिप्त लेकिन सियासी मायने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'सरकार बदलेगी तो काम होगा।'

बस फिर क्या था! उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई अटकलें शुरू हो गईं। आखिर अनंत सिंह किस सरकार के बदलने की बात कर रहे थे? क्या यह सिर्फ मौजूदा व्यवस्था पर तंज था या उन्हें आने वाले दिनों में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की भनक है?

हालांकि, अनंत सिंह ने अपने बयान में यह साफ नहीं किया कि वह किस तरह के सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं। न ही उन्होंने किसी राजनीतिक दल या नेता का नाम लिया। इसलिए इस बयान को फिलहाल राजनीतिक संकेत और अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है।

सरेंडर से पहले शक्ति प्रदर्शन या दोस्ती निभाने निकले छोटे सरकार?

अनंत सिंह की प्रयागराज यात्रा को लेकर एक और चर्चा गर्म है। उनके काफिले में 100 से अधिक गाड़ियों की मौजूदगी और रास्ते में जगह-जगह हुए स्वागत को सरेंडर से पहले शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस पूरे कार्यक्रम के पीछे उन्होंने अपने तीन दशक पुराने दोस्त पप्पू सलमान के बेटे के दावत-ए-वलीमा में शामिल होने की वजह बताई है। पटना से प्रयागराज की करीब 400 किलोमीटर की सड़क यात्रा में उनका काफिला कई जिलों से होकर गुजरा। आरा, बक्सर से लेकर यूपी के अलग-अलग इलाकों में समर्थकों ने उनका स्वागत किया।

रास्ते में वाराणसी में यूपी पुलिस ने उनके काफिले को शहर में प्रवेश करने से रोक दिया। इसके बाद अनंत सिंह प्रयागराज के लिए रवाना हो गए। उनकी योजना बीएचयू जाकर महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने की भी थी।

कौन हैं पप्पू सलमान, जिनके लिए 400 किलोमीटर दौड़े अनंत सिंह?

अनंत सिंह की इस यात्रा की सबसे दिलचस्प कहानी उनके दोस्त पप्पू सलमान से जुड़ी है। पप्पू सलमान का असली नाम सलमान अहमद है। उन्हें प्रयागराज में पप्पू मलावां के नाम से भी जाना जाता है। वह समाजवादी पार्टी की स्थापना के समय से ही उससे जुड़े हुए हैं और फिलहाल पार्टी संगठन में गंगापार जिला उपाध्यक्ष बताए जाते हैं।

पप्पू सलमान का समाजवादी पार्टी की राजनीति से भी पुराना नाता रहा है। वह दिवंगत सपा नेता जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित के करीबी रहे हैं। हालांकि, पप्पू सलमान खुद चुनावी राजनीति में सक्रिय उम्मीदवार के तौर पर सामने नहीं आए हैं। अनंत सिंह और पप्पू सलमान की दोस्ती करीब तीन दशक पुरानी बताई जाती है। खास बात यह है कि दोनों की दोस्ती राजनीति के कारण नहीं, बल्कि घोड़ों के शौक की वजह से हुई थी।

घोड़ों के शौक ने जोड़ दिए दो बाहुबलियों के तार

अनंत सिंह का घोड़ों के प्रति प्रेम किसी से छिपा नहीं है। उनके अस्तबल में करीब 8-9 घोड़े बताए जाते हैं। इनमें लाडला नाम का घोड़ा काफी चर्चित रहा है, जिसने बिहार और यूपी में कई रेस जीती हैं। दूसरी तरफ पप्पू सलमान भी घोड़ों के शौकीन हैं। उनके पास करीब चार घोड़े हैं और उनमें से एक की कीमत 20 लाख रुपये से अधिक बताई जाती है। आरा के जय कुमार सिंह ने दोनों की पहली मुलाकात कराई थी। इसके बाद घोड़ों की रेस और इसी शौक ने दोनों को करीब ला दिया। दोनों परिवारों के बीच भी आना-जाना रहा है। यही वजह है कि दोस्त के बेटे के वलीमा में शामिल होने के लिए अनंत सिंह इतनी लंबी यात्रा पर निकल पड़े।

तेजस्वी यादव की वापसी का क्या होगा?

अनंत सिंह के 'सरकार बदलेगी तो काम होगा' वाले बयान ने सबसे बड़ा सवाल बिहार की सत्ता को लेकर खड़ा कर दिया है। क्या आने वाले दिनों में कोई नया राजनीतिक समीकरण बनेगा? क्या एनडीए के भीतर कोई बड़ा बदलाव होगा? या फिर यह सिर्फ एक विधायक की नाराजगी और स्थानीय विकास को लेकर दिया गया बयान है?

तेजस्वी यादव और विपक्ष के लिए भी यह सवाल अहम है कि क्या बिहार में सत्ता परिवर्तन की कोई संभावना बन रही है। हालांकि, अनंत सिंह के बयान से सीधे तौर पर तेजस्वी यादव की वापसी का कोई संकेत नहीं मिलता। फिलहाल न किसी राजनीतिक दल ने सत्ता परिवर्तन का दावा किया है और न ही अनंत सिंह ने अपने बयान का कोई विस्तृत राजनीतिक अर्थ बताया है।

ऐसे में छोटे सरकार के इस एक वाक्य ने सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म कर दिया है। अब देखना होगा कि यह बयान महज एक राजनीतिक तंज साबित होता है या आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की भूमिका तैयार करता है।