Bihar Politics : बिहार की सियासत में इन दिनों मोकामा विधायक अनंत सिंह को लेकर माहौल गरम है। 24 अक्टूबर की शाम जनता दल यूनाइटेड ने बड़ा फैसला लेते हुए मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी व पूर्व विधायक नीलम देवी को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। इतना ही नहीं, अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता खत्म करने की अनुशंसा भी विधानसभा अध्यक्ष से की गई है। जेडीयू के इस एक्शन के बाद अब इस पूरे मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है।


अनंत सिंह पर हुई कार्रवाई के ठीक बाद अब केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह मुख्यमंत्री आवास पहुंचे हैं। यहां उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से हुई है। दोनों नेताओं के बीच करीब 30 मिनट से ज्यादा समय तक बंद कमरे में बातचीत हुई। ऐसे में इस मुलाकात को लेकर बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।


सूत्रों के मुताबिक, बातचीत के दौरान अनंत सिंह के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि ललन सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को यह जानकारी दी कि पार्टी ने अनंत सिंह के खिलाफ इतना बड़ा फैसला आखिर किन परिस्थितियों में लिया। इसके साथ ही आगे अनंत सिंह को लेकर क्या कदम उठाए जा सकते हैं, इस पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई।


दरअसल, अनंत सिंह और जेडीयू के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार के बीच चल रहा विवाद पिछले कई दिनों से बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना हुआ था। मोकामा से लेकर पटना तक इस विवाद की चर्चा हो रही थी। अनंत सिंह लगातार नीरज कुमार को निशाने पर लेते रहे, वहीं पार्टी नेतृत्व के सामने भी यह मामला लगातार गंभीर होता गया।


इसी बीच जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने साफ तौर पर कहा था कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी ललन सिंह को दी गई है। इसकी वजह भी उन्होंने बताई थी। संजय झा के मुताबिक, ललन सिंह इस इलाके से आते हैं, वह इस क्षेत्र के सांसद हैं और इलाके की राजनीतिक परिस्थितियों को अच्छी तरह समझते हैं। ऐसे में इस पूरे मामले को संभालने के लिए ललन सिंह सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं।


हालांकि, उस समय ललन सिंह की प्रतिक्रिया ने भी सियासी चर्चा को और हवा दे दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी अनंत सिंह पर कार्रवाई करती है तो नीरज कुमार पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा था कि पार्टी से इस मामले में भूल हुई है। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई।24 अक्टूबर की शाम जेडीयू ने पत्र जारी कर अनंत सिंह और नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। यानी जिस विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा रही थी, वह आखिरकार पार्टी कार्रवाई तक पहुंच गया।


अब इसके बाद ललन सिंह का मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह मुलाकात सिर्फ अनंत सिंह पर हुई कार्रवाई की जानकारी देने के लिए थी या फिर आगे की रणनीति भी तैयार की गई? क्या अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर सरकार का रुख भी तय किया जा रहा है? और क्या आने वाले दिनों में इस मामले में कोई और बड़ा फैसला हो सकता है?


फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं, लेकिन इतना जरूर है कि अनंत सिंह प्रकरण अब सिर्फ पार्टी के अंदर की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। जेडीयू के फैसले के बाद मुख्यमंत्री आवास पर ललन सिंह और सम्राट चौधरी की लंबी मुलाकात ने इस पूरे मामले को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।अब सबकी नजर इस बात पर है कि अनंत सिंह को लेकर सरकार और जेडीयू आगे क्या कदम उठाते हैं और मोकामा की इस सियासी लड़ाई का अगला अध्याय क्या होगा।