Anant Singh Gang : बिहार की राजनीति में इस वक्त चर्चा एक ऐसे विधायक की हो रही है, जिसे 'छोटे सरकार' या 'डॉन ऑफ मोकामा' जैसे उपनामों से भी पहचाना जाता है। अब इस विधायक ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसको लेकर न सिर्फ बिहार, बल्कि देशभर में चर्चा हो रही है। दरअसल, जेडीयू से जुड़े मोकामा विधानसभा के विधायक अनंत सिंह ने बीते कल सुबह-सुबह बयान दिया कि उन्होंने अपने 9 लोगों की कुर्बानी नीतीश कुमार के लिए दी है। लेकिन शुरुआत में उनका बयान देने का अंदाज ऐसा था कि लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि शायद अनंत सिंह यह कह रहे हैं कि उन्होंने नीतीश कुमार के लिए 9 लोगों का मर्डर करवाया।


उनके इस बयान के बाद तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। इसके बाद जब विवाद बढ़ा तो अनंत सिंह ने देर शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर चीजों को स्पष्ट किया कि आखिर वह कहना क्या चाहते थे। लेकिन अब सबसे अधिक चर्चा उस घटनाक्रम की हो रही है कि आखिर 2004 में ऐसा क्या हुआ था, जिसको लेकर अनंत सिंह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने कुर्बानी दी है।


दरअसल, साल था 2004 और तारीख थी 2 अगस्त। उस दिन पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल के लदमा गांव में सोमवार की सुबह एसटीएफ और पटना पुलिस की संयुक्त टीम तथा कुख्यात अनंत सिंह गिरोह के अपराधियों के बीच करीब छह घंटे तक चली भीषण मुठभेड़ में गिरोह के आठ सदस्य मारे गए थे। इस मुठभेड़ में एक एसटीएफ जवान की भी मौत हो गई थी।


मुठभेड़ में मारे गए सभी आठ अपराधियों की पहचान पुलिस ने भीम सिंह, डेनी, चिंटू कुमार, गणेश कुमार, बाल्मीकि सिंह, सुनील कुमार, रजनीश और सुरेंद्र कहार उर्फ बिठ्ठल के रूप में की थी। इनमें से भीम सिंह, डेनी, चिंटू कुमार, गणेश कुमार और बाल्मीकि सिंह बाढ़ अनुमंडल के रहने वाले थे, जबकि सुनील कुमार और रजनीश लदमा गांव तथा सुरेंद्र कहार उर्फ बिठ्ठल पटना का रहने वाला था। पुलिस के मुताबिक, ये सभी अपराधी हत्या, अपहरण, डकैती, लूट और रंगदारी समेत एक दर्जन से अधिक मामलों में वांछित थे। मुठभेड़ के दौरान सभी आठ अपराधी मौके पर ही मारे गए।


एसटीएफ के जवान रघुवंश प्रताप सिंह को भी मुठभेड़ के दौरान गोली लगी थी। गंभीर रूप से घायल रघुवंश की पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हो गई। एसटीएफ के तत्कालीन एसपी जेएस गंगवार ने बताया था कि रघुवंश प्रताप सिंह वैशाली जिले के बिदुपुर थाना क्षेत्र के खड़िका गांव के रहने वाले थे। उनकी इस घटना में मौत हो गई थी।


पुलिस ने उस वक्त इस घटना को लेकर बताया था कि लदमा गांव में अपराधियों के किसी बड़ी वारदात की साजिश रचने की सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर एसटीएफ और पटना पुलिस की संयुक्त टीम गांव पहुंची। पुलिस टीम ने जैसे ही अपराधियों को चुनौती दी, उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी 50 से अधिक राउंड गोलियां चलाईं। इसके बाद करीब छह घंटे तक मुठभेड़ चलती रही।


वहीं, एसटीएफ के तत्कालीन डीआईजी विनय कुमार सिंह ने बताया था कि अपराधी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे। पुलिस ने इलाके में दिनभर छापेमारी भी की। इस दौरान पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान बिमल महतो, गुड्डू राम, कुमार भैरव, नंदन कुमार और सुनील राम के रूप में हुई थी। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने लदमा गांव में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान चार सेमी ऑटोमेटिक राइफल, दो डबल बैरल बंदूक, दो देसी पिस्तौल और 70 खोखे के साथ 25 जिंदा कारतूस बरामद किए गए।


उस दौरान पुलिस ने अनंत सिंह के दो मंजिला मकान में भी छापेमारी की। बताया गया कि इस मकान में एक सुरंग बनाई गई थी। पुलिस के मुताबिक, सुरंग में दो अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए। एसटीएफ के तत्कालीन एसपी जेएस गंगवार ने बताया था कि यह मकान अनंत सिंह ने विशेष रूप से बनवाया था। अपराधी अक्सर हथियार और गोला-बारूद के साथ इस सुरंग में छिपने के लिए इसका इस्तेमाल करते थे। यह सुरंग आगे एक तालाब तक जाती थी। पुलिस के अनुसार, अनंत सिंह उस समय न्यायिक हिरासत में थे। उनके खिलाफ हत्या, अपहरण और लूट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज थे। वह मोकामा के दियारा इलाके में काफी प्रभावशाली और कुख्यात माने जाते थे।


इस मुठभेड़ में पहली बार एसटीएफ का कोई जवान मारा गया था। सरकार ने शहीद जवान रघुवंश प्रताप सिंह के परिवार को 10 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की थी। इसके अलावा नियमों के तहत मिलने वाला अन्य मुआवजा भी परिवार को दिया जाना था। सरकार की ओर से उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने की बात भी कही गई थी।


अब इसी घटनाक्रम को लेकर अनंत सिंह यह दावा करते हैं कि उन्होंने साल 2004 में नीतीश कुमार के लिए अपने 9 लोगों की कुर्बानी दी थी। हालांकि, इस घटना में 9 लोगों की जान जरूर गई थी, लेकिन इसमें अनंत सिंह गैंग के 8 लोगों के ही मारे जाने की पुष्टि पुलिस महकमे की ओर से की गई थी। उस समय बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर राबड़ी देवी बैठी हुई थीं। नीतीश कुमार को लेकर अनंत सिंह का दावा है कि उस समय नीतीश कुमार इतने चर्चित चेहरा भी नहीं थे।