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26-Feb-2026 10:14 AM
By First Bihar
Bihar Highway Project : भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे आमस-दरभंगा फोरलेन निर्माण में पटना जिले के रामनगर से कच्ची दरगाह के बीच जमीन अधिग्रहण को लेकर नया विवाद सामने आया है। फतुहा और दीदारगंज अंचल में करीब 30 एकड़ जमीन की प्रकृति को लेकर असमंजस की स्थिति है। रैयत जहां उक्त जमीन को अपनी निजी (रैयती) जमीन बता रहे हैं, वहीं जिला प्रशासन का दावा है कि यह सरकारी जमीन है। इस विवाद के कारण अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी पटना सिटी के डीसीएलआर को सौंपी गई है। डीसीएलआर स्तर से जांच पूरी कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि संबंधित जमीन के दावेदार रैयतों से स्वामित्व से जुड़े कागजात मांगे गए हैं, लेकिन अब तक पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। दूसरी ओर जिला प्रशासन भी अपने स्तर से अभिलेखों की जांच कर यह साबित करने में जुटा है कि जमीन सरकारी है या नहीं।
सूत्रों के अनुसार फतुहा अंचल में लगभग 25 एकड़ जमीन बकास्त या गैर-मालिकाना श्रेणी में बताई जा रही है, जबकि दीदारगंज अंचल में करीब पांच एकड़ जमीन बकास्त है। हालांकि रैयत इन दावों से सहमत नहीं हैं और अपने अधिकार का दावा कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा सीमांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, इसके बावजूद जमीन अधिग्रहण में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
प्रशासन की ओर से संबंधित रैयतों को नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। रैयतों द्वारा जमा कराए गए कागजात की गहन जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि जमीन रैयती है या सरकारी। यदि जमीन रैयती पाई जाती है तो संबंधित रैयतों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। वहीं यदि जमीन सरकारी सिद्ध होती है तो उसे केवल परियोजना के लिए स्थानांतरित किया जाएगा और मुआवजा देय नहीं होगा।
रामनगर-कच्ची दरगाह एनएच-119डी सड़क निर्माण परियोजना में मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया भी सुस्त गति से चल रही है। फोरलेन निर्माण के लिए कुल 187 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। इसके एवज में लगभग 207 करोड़ रुपये मुआवजा भुगतान का प्रावधान किया गया है। लेकिन अब तक मात्र 55 रैयतों को 10.67 करोड़ रुपये का ही भुगतान हो सका है। बाकी रैयत मुआवजे की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जमीन विवाद और कागजी प्रक्रिया में देरी के कारण परियोजना की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। आमस-दरभंगा फोरलेन को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम माना जा रहा है, जिससे पटना समेत आसपास के जिलों को बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी। ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि जमीन से जुड़े विवादों का जल्द निपटारा कर निर्माण कार्य को गति दी जाए।अब सबकी नजर डीसीएलआर की जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि विवादित 30 एकड़ जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और आगे की कार्रवाई किस दिशा में होगी।