Agniveer Bharti : बिहार में अग्निवीर और पुलिस भर्ती के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। पूर्वी चंपारण जिले के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र से पुलिस ने एक पूर्व सैनिक को गिरफ्तार किया है, जो युवाओं को सेना और पुलिस में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान शिवेंद्र भूषण कुमार के रूप में हुई है। पूछताछ के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।


जानकारी के अनुसार इन दिनों मुजफ्फरपुर के चक्कर मैदान में अग्निवीर भर्ती रैली चल रही है। इसी बीच आर्मी इंटेलिजेंस और जिला सूचना इकाई (DIU) को भर्ती में गड़बड़ी और दलालों के सक्रिय होने की सूचना मिली थी। इसके बाद मोतिहारी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को दबोच लिया। पुलिस जब उसके ठिकाने पर पहुंची तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। मौके से अग्निवीर भर्ती, बिहार पुलिस बहाली और एसएससी परीक्षा से जुड़े कई एडमिट कार्ड बरामद किए गए। इसके अलावा दर्जनों छात्रों के मैट्रिक और इंटर के मूल प्रमाण पत्र भी पुलिस ने जब्त किए हैं।


जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी मोतिहारी में पुलिस और सेना भर्ती की तैयारी कराने के नाम पर फिजिकल ट्रेनिंग एकेडमी चलाता था। वहीं आने वाले बेरोजगार युवाओं को नौकरी की गारंटी देने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी करीब 80 से 100 युवाओं से तीन-तीन लाख रुपये तक लेने की तैयारी में था। कई छात्रों से उसने एडवांस के तौर पर पैसे भी लिए थे।


इस मामले का खुलासा तब हुआ जब रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के सोरपनिया पचपकड़ी निवासी कमलेश कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कमलेश ने बताया कि वह करीब पांच महीने पहले मोतिहारी के गांधी मैदान में सिपाही भर्ती की दौड़ की तैयारी करने गया था। वहीं उसकी मुलाकात शिवेंद्र भूषण कुमार से हुई। आरोपी ने खुद को प्रभावशाली बताते हुए दावा किया कि उसकी पहुंच सेना और पुलिस भर्ती बोर्ड तक है और वह “सेटिंग” के जरिए नौकरी दिला सकता है।


कमलेश के अनुसार आरोपी ने केवल उसे ही नहीं बल्कि वहां अभ्यास करने आने वाले कई अन्य युवाओं को भी भरोसे में लिया। बाद में लगभग 100 अभ्यर्थियों को रघुनाथपुर बुलाकर नौकरी पक्की कराने का भरोसा दिया गया। आरोपी युवाओं से कहता था कि लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट की चिंता छोड़ दें, क्योंकि पैसे के बदले चयन सुनिश्चित करा दिया जाएगा।


पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि बिहार के कई जिलों में इस तरह के गिरोह सक्रिय हैं। ये लोग सेना, पुलिस और अन्य सरकारी नौकरियों में भर्ती कराने के नाम पर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाते हैं। फिजिकल ट्रेनिंग सेंटर और एकेडमी खोलकर युवाओं को पहले तैयारी के नाम पर जोड़ा जाता है, फिर उन्हें “अंदरूनी सेटिंग” और “पक्का चयन” का लालच दिया जाता है। कई बार नौकरी नहीं होने पर कुछ पैसे वापस कर दिए जाते हैं ताकि गिरोह पर आसानी से शक न हो।


फिलहाल पुलिस आरोपी के नेटवर्क और उसके साथ जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है। बरामद दस्तावेजों और मोबाइल फोन की जांच की जा रही है। सेना और बिहार पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि किसी भी दलाल या बिचौलिए के झांसे में न आएं। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है और नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वाले लोगों की तुरंत सूचना पुलिस को दें।