Bihar JDU News : बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद जेडीयू के अंदर चल रही हलचल अब खुलकर सामने आने के संकेत दे रही है। चुनाव में पार्टी को मिले झटकों के बाद सहयोगियों की भूमिका, चुनावी रणनीति और संगठन के भीतर की नाराजगी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इस बीच जेडीयू के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक झा के एक बयान ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। अभिषेक झा ने साफ कर दिया है कि फिलहाल वह मीडिया के सामने अपनी बात नहीं रखेंगे। इसके लिए उन्होंने 5 नवंबर की तारीख तय की है। यानी अब सबकी नजरें जेडीयू की प्रस्तावित समीक्षा बैठक पर टिक गई हैं।
अभिषेक झा ने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और मीडिया के साथियों को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद से ही लगातार पत्रकारों के फोन आ रहे थे। उनसे इंटरव्यू और चुनाव के नतीजों को लेकर प्रतिक्रिया मांगी जा रही थी। मीडिया के कई साथी उनसे बातचीत करना चाहते थे और चुनाव के बाद पार्टी के भीतर बन रहे राजनीतिक माहौल को समझना चाहते थे। इसी सिलसिले में उन्होंने सोमवार को अपने आवास पर मीडिया के साथियों को बुलाया था। हालांकि, अब उन्होंने मीडिया से बातचीत को कुछ दिनों के लिए टालने का फैसला किया है।
इस फैसले के पीछे उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से हुई बातचीत को अहम बताया है।अभिषेक झा के मुताबिक, उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा से फोन पर बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने अपनी सारी बातें दोनों नेताओं के सामने विस्तार से रखी हैं। हालांकि, उन्होंने बातचीत में किन मुद्दों को उठाया और चुनाव परिणाम को लेकर उनकी क्या नाराजगी है, इसका खुलासा फिलहाल नहीं किया है।
अभिषेक झा के बयान में सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस वाक्य की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उनके मन में बहुत सारे भाव हैं इन भावों को वह पूरी साफगोई के साथ अपने परिवार यानी अपनी पार्टी जेडीयू और अपने नेता के सामने रखेंगे। उनके इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर पार्टी के भीतर कुछ ऐसे सवाल हैं, जिन पर खुलकर चर्चा हो सकती है। हालांकि, उन्होंने किसी नेता या सहयोगी दल का नाम लेकर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया है।
दरअसल, बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए और खासकर जेडीयू के राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई सवाल उठे हैं। चुनाव में कुछ सीटों पर पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। सारण शिक्षक और तिरहुत स्नातक सीट पर जेडीयू समर्थित उम्मीदवारों को निर्दलीय प्रत्याशियों से चुनौती मिली। इन नतीजों के बाद गठबंधन के भीतर चुनावी तालमेल और सहयोगियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ऐसे में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता का यह कहना कि वह अपनी सारी बातें नेतृत्व के सामने रखेंगे, राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अभिषेक झा ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि 5 नवंबर को जेडीयू प्रदेश कार्यालय में विधान परिषद चुनाव को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में चुनाव के दौरान पार्टी की तैयारियों, उम्मीदवारों के प्रदर्शन, संगठन की भूमिका और चुनावी नतीजों पर चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस बैठक में उन कारणों पर भी मंथन हो सकता है, जिनकी वजह से कुछ सीटों पर पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।
अभिषेक झा ने साफ कहा है कि समीक्षा बैठक से पहले वह मीडिया के सामने कोई बयान नहीं देंगे। 5 नवंबर के बाद ही पत्रकारों और मीडिया के साथियों से बातचीत होगी। उन्होंने मीडिया से इस असुविधा के लिए खेद भी जताया है। उनका यह रुख बताता है कि वह फिलहाल सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय पार्टी के अंदर अपनी बात रखने को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
हालांकि, उनके इस संदेश के बाद राजनीतिक गलियारों में कई सवाल उठने लगे हैं।क्या विधान परिषद चुनाव में जेडीयू के प्रदर्शन को लेकर पार्टी के अंदर असंतोष है? क्या चुनाव के दौरान सहयोगी दलों की भूमिका को लेकर कुछ नेताओं की शिकायतें हैं? क्या संगठन के स्तर पर हुई चूक को समीक्षा बैठक में उठाया जाएगा? या फिर अभिषेक झा की नाराजगी किसी खास चुनावी घटनाक्रम से जुड़ी है? इन सवालों का जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है।
एक बात जरूर साफ है कि अभिषेक झा ने मीडिया के सामने कुछ भी कहने से पहले पार्टी नेतृत्व को भरोसे में लेने का फैसला किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संजय झा से बातचीत कर अपनी बात रख दी है। अब 5 नवंबर की समीक्षा बैठक के बाद ही पता चलेगा कि उनके मन में चल रहे सवाल और भावनाएं पार्टी के भीतर किस तरह सामने आती हैं।
फिलहाल जेडीयू की इस बैठक को केवल चुनावी हार-जीत की समीक्षा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यह बैठक पार्टी के अंदरूनी मंथन और गठबंधन की राजनीति के लिहाज से भी अहम हो सकती है। ऐसे में सवाल यही है कि 5 नवंबर को बंद कमरे में होने वाली चर्चा के बाद जेडीयू की ओर से क्या संदेश निकलकर सामने आता है और क्या अभिषेक झा अपनी चुप्पी तोड़कर उन मुद्दों पर खुलकर बोलेंगे, जिनका जिक्र उन्होंने अपने संदेश में किया है?