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28-Jan-2026 07:36 AM
By First Bihar
Bihar Job News : बिहार में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब आठवीं कक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को भी कंडक्टर लाइसेंस जारी किया जाएगा। परिवहन विभाग ने मंगलवार को इससे संबंधित आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। विभागीय आदेश के अनुसार यह नई व्यवस्था 28 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गई है।
अब तक कंडक्टर लाइसेंस के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य थी। यह प्रावधान बिहार मॉडल नियमावली 1922 के तहत लागू था। लेकिन राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए इसे सरल बना दिया है। संशोधित नियम के अनुसार अब किसी भी मान्यता प्राप्त स्कूल से आठवीं कक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थी कंडक्टर लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे।
परिवहन विभाग का आदेश
परिवहन विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की जरूरतों और युवाओं को अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है, जो दसवीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए हैं।
विभाग का मानना है कि शैक्षणिक योग्यता में छूट देने से बसों में कंडक्टरों की कमी को भी दूर किया जा सकेगा। लंबे समय से राज्य के कई जिलों में योग्य कंडक्टरों की कमी देखी जा रही थी, जिससे परिवहन सेवाएं प्रभावित हो रही थीं।
सारथी पोर्टल से होगा आवेदन
संशोधित शैक्षणिक योग्यता के आधार पर कंडक्टर लाइसेंस के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी सारथी पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों को आठवीं कक्षा उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
ऑनलाइन आवेदन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन किया जाएगा और सभी शर्तें पूरी होने पर कंडक्टर लाइसेंस जारी किया जाएगा। विभाग ने सभी जिला परिवहन पदाधिकारियों को नए नियमों के अनुसार आवेदन स्वीकार करने के निर्देश भी दे दिए हैं।
युवाओं में खुशी
सरकार के इस फैसले के बाद युवाओं में खुशी की लहर है। खासकर उन अभ्यर्थियों में उत्साह देखा जा रहा है जो आर्थिक कारणों से आगे की पढ़ाई नहीं कर सके थे। उनका कहना है कि यह फैसला उनके लिए रोजगार का नया रास्ता खोलेगा। बस ऑपरेटरों और निजी परिवहन कंपनियों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे योग्य कंडक्टर आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे और परिवहन सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। कम शैक्षणिक योग्यता वाले युवाओं को औपचारिक रोजगार मिलने से बेरोजगारी दर में कमी आएगी। साथ ही, ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर पलायन भी कुछ हद तक कम हो सकता है।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कंडक्टरों को आवश्यक प्रशिक्षण और नियमों की जानकारी देना अनिवार्य रहेगा।कुल मिलाकर, आठवीं पास अभ्यर्थियों को कंडक्टर लाइसेंस देने का यह फैसला बिहार में रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे हजारों युवाओं को सीधा लाभ मिल सकता है।