Bihar Flood News: पश्चिम चंपारण के हरनाटांड़ में बाढ़ के कारण जब सड़क और नदी पार करने का रास्ता बंद हो गया, तो ग्रामीणों ने बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए खाट को ही एंबुलेंस बना दिया. स्वजन और ग्रामीण खाट पर महिला को लिटाकर कंधे के सहारे बाढ़ का पानी पार करते हुए हरनाटांड़ अस्पताल पहुंचे. यह तस्वीर पश्चिम चंपारण के दोन क्षेत्र में बरसात के दौरान सामने आने वाली स्वास्थ्य और आवागमन की गंभीर समस्या को दिखाती है.


मामला गर्दी दोन क्षेत्र का है. यहां सुताही महतो की पत्नी कुमारी देवी सोमवार को अचानक पेट और कमर में तेज दर्द से परेशान हो गईं. दर्द के कारण वह चलने की स्थिति में नहीं थीं. स्वजन ने पहले स्थानीय ग्रामीण चिकित्सक से उनका उपचार कराया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ. इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें हरनाटांड़ ले जाने की तैयारी की गई.


इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की तैयारी के दौरान सबसे बड़ी समस्या रास्ते में खड़ी थी. हरहा नदी में बाढ़ का पानी बढ़ने के कारण आवागमन बाधित था. नदी का पानी तेज बहाव में था और किसी वाहन से मरीज को दूसरी ओर ले जाना संभव नहीं था. महिला की हालत को देखते हुए स्वजन ने ग्रामीणों से मदद मांगी.


इसके बाद ग्रामीणों ने खाट की व्यवस्था की. कुमारी देवी को खाट पर लिटाया गया और कई ग्रामीणों ने मिलकर उसे कंधे पर उठा लिया. बाढ़ के पानी के बीच ग्रामीण सावधानी से खाट लेकर नदी पार करते रहे. नदी पार करने के बाद महिला को हरनाटांड़ ले जाया गया, जहां उनका इलाज कराया गया.


सामाजिक कार्यकर्ता अजय महतो और संदीप महतो ने बताया कि महिला को जल्द से जल्द इलाज की जरूरत थी. नदी में बाढ़ के कारण वाहन नहीं जा सकता था, इसलिए ग्रामीणों ने मिलकर महिला को खाट के सहारे नदी पार कराने का फैसला लिया.


22 गांवों के सामने हर साल खड़ी होती है यही समस्या

दोन क्षेत्र के करीब 22 गांव बरसाती पहाड़ी नदियों से घिरे हुए हैं. इस इलाके में करीब 70 हजार की आबादी रहती है. स्थानीय स्तर पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए हरनाटांड़ या रामनगर जाना पड़ता है.


बरसात के मौसम में हरहा नदी में पानी बढ़ने के साथ इन गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है. नदी के उफान पर आने के बाद मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे में कई बार ग्रामीणों को मरीजों को खाट, चारपाई या अन्य साधनों के सहारे नदी पार करानी पड़ती है.


ग्रामीणों का कहना है कि हरहा नदी पर आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण हर साल बारिश के मौसम में ऐसी स्थिति पैदा होती है. गंभीर रूप से बीमार मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है और आपात स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है.