Valmiki Tiger Reserve Heli Tourism: बिहार के पश्चिमी चंपारण स्थित वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व (VTR) को पर्यटन के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिलने जा रही है. अब पर्यटक सड़क और रेल के साथ-साथ हवाई सफर के जरिए भी वाल्मीकिनगर पहुंच सकेंगे. सरकार वाल्मीकिनगर को हेली टूरिज्म से जोड़ने की तैयारी कर रही है, जिससे राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बीच कनेक्टिविटी और बेहतर होगी.


प्रशासनिक स्तर पर योजना के तहत वाल्मीकिनगर को राजगीर और कैमूर स्थित प्रसिद्ध मां मुंडेश्वरी मंदिर से हेलीकॉप्टर सेवा के माध्यम से जोड़ा जाएगा. प्रस्तावित हेली सेवा जुलाई 2026 से शुरू होकर 15 जनवरी 2027 तक संचालित होने की संभावना है. इससे पर्यटकों को कम समय में बिहार के अलग-अलग पर्यटन स्थलों तक पहुंचने का मौका मिलेगा.


वहीं वाल्मीकिनगर हवाई अड्डे से 19 सीटर विमान सेवा शुरू करने की भी तैयारी चल रही है. इसके लिए एयरपोर्ट के विस्तार का काम तेजी से किया जा रहा है. वर्तमान में एयरपोर्ट के लिए करीब 45 एकड़ जमीन उपलब्ध है, जबकि अतिरिक्त 7 एकड़ जमीन की व्यवस्था भी पूरी कर ली गई है.


हालांकि विमान सेवा शुरू होने की आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन पर्यटन सीजन के दौरान इसके शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है. संभावना है कि शुरुआत में हेलीकॉप्टर और विमान सेवाओं का संचालन सप्ताह में दो दिन किया जा सकता है.


बढ़ती सुविधाओं से वीटीआर पहुंच रहे ज्यादा पर्यटक

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है. यहां पर्यटकों के ठहरने के लिए सरकारी स्तर पर छह रेंजों में 56 कमरे उपलब्ध हैं, जिनमें करीब 124 लोगों के रहने की व्यवस्था है.


सुविधाओं में सुधार का असर पर्यटकों की संख्या पर भी दिख रहा है. आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 में करीब 92 हजार पर्यटक वीटीआर पहुंचे थे. इसके बाद संख्या तेजी से बढ़ी और 2024-25 में यह आंकड़ा करीब 4.80 लाख तक पहुंच गया.


वर्ष 2025-26 में 30 मई तक ही करीब 6.20 लाख पर्यटक वीटीआर का भ्रमण कर चुके हैं. इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं. इंग्लैंड और फ्रांस समेत कई देशों के पर्यटक यहां की जैव विविधता और जंगल सफारी का आनंद लेने पहुंच रहे हैं.


थारू गांवों में होम स्टे से बढ़ेगा रोजगार

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने वीटीआर से जुड़े गांवों में होम स्टे योजना को भी आगे बढ़ाया है. इसके तहत पर्यटकों को होटल के बजाय स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन का अनुभव मिलेगा.


‘सीएम होम स्टे प्रोत्साहन योजना 2026’ के तहत तरुअनवा, बरवा कलां, संतपुर और दरुआबारी जैसे गांवों में होम स्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है.


इस योजना के तहत युवाओं को होम स्टे शुरू करने के लिए अधिकतम 11 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी. इससे स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है.


होम स्टे के जरिए पर्यटक थारू समाज की पारंपरिक संस्कृति, खान-पान और लोक कला को करीब से जान सकेंगे. स्थानीय संचालकों का कहना है कि सरकारी मदद मिलने से अब छोटे स्तर पर चल रहे होम स्टे को भी बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकेगा.