Valmiki Tiger Reserve News: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में बाघ, तेंदुआ, हिरण और गौर जैसे वन्यजीवों के संरक्षण के साथ अब संकटग्रस्त गिद्धों के संरक्षण और संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियों वाले वीटीआर में गिद्धों की संख्या बढ़ाने और उनके लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया गया है.


वीटीआर प्रशासन की ओर से गोनौली वन प्रक्षेत्र में गिद्ध संरक्षण को लेकर पहल शुरू की गई है. इसके तहत गिद्धों की सुरक्षा, उनके लिए भोजन की उपलब्धता और सुरक्षित वातावरण तैयार करने पर काम किया जा रहा है. वीटीआर प्रशासन के अनुसार, फिलहाल गिद्धों के घोंसले मुख्य रूप से रिजर्व के कोर क्षेत्र में पाए जा रहे हैं.


बफर क्षेत्र में भी बढ़ सकती है गिद्धों की मौजूदगी

वीटीआर प्रशासन का मानना है कि संरक्षण की कोशिशें सफल रहीं तो आने वाले चार-पांच वर्षों में बफर क्षेत्र में भी गिद्धों की मौजूदगी बढ़ सकती है. इस पूरी प्रक्रिया में वीटीआर के फील्ड बायोलॉजिस्ट और पशु चिकित्सक की भूमिका अहम है. गिद्धों के व्यवहार, उनके आवास और भोजन की उपलब्धता पर लगातार नजर रखने की व्यवस्था की जा रही है.


गिद्धों के संरक्षण के लिए उनके भोजन की उपलब्धता और उसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. पहले पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ प्रतिबंधित दवाओं के अवशेषों के कारण गिद्धों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी.


ऐसी दवाओं के अवशेष वाले मृत पशुओं को खाने से गिद्धों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. इसी को देखते हुए वीटीआर में प्राकृतिक रूप से मृत वन्यजीवों के शव गिद्धों के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है.


इसके अलावा बाहरी पशुओं के शव और उनके अवशेष वीटीआर क्षेत्र में पहुंचने की स्थिति में भी निगरानी रखी जा रही है, ताकि गिद्धों को किसी तरह के जहरीले या हानिकारक खाद्य पदार्थ से बचाया जा सके.


देश में आठ जगहों पर गिद्ध संरक्षण केंद्र

गिद्धों के संरक्षण और प्रजनन के लिए देश में अब तक आठ केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं. इनमें हरियाणा का पिंजौर, पश्चिम बंगाल का राजाभातखावा, असम का रानी, मध्य प्रदेश का केरवा, गुजरात का सक्करबाग चिड़ियाघर और जूनागढ़, ओडिशा का नंदनकानन चिड़ियाघर, भुवनेश्वर, तेलंगाना का नेहरू प्राणी उद्यान, हैदराबाद और झारखंड का मुटा, रांची शामिल हैं.