BETTIAH: बेतिया के योगापट्टी प्रखंड के सिसवा मंगलपुर पंचायत के ग्रामीण बाढ़ और गंडक नदी के कटाव की दोहरी मार झेल रहे हैं। करीब दो महीने से जलजमाव और कटाव की समस्या से परेशान ग्रामीणों का मंगलवार को सब्र जवाब दे गया। दर्जनों ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह कर प्रशासन और सरकार के खिलाफ विरोध जताया।
ग्रामीण नाव के सहारे सिसवा मंगलपुर से बाहर निकले और करीब 7 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए सिसवा मंगलपुर-बड़हरवा मुख्य सड़क, टकटकवा, मुशहटोली और फहतेपुर चौक होते हुए योगापट्टी प्रखंड मुख्यालय पहुंचे। यहां अंचल कार्यालय परिसर में ग्रामीणों ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया।
दो महीने से पानी में डूबी मुख्य सड़क
ग्रामीणों के मुताबिक, सिसवा मंगलपुर गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर करीब चार से पांच फीट तक पानी जमा है। लंबे समय से जलजमाव के कारण सड़क पर आवागमन पूरी तरह प्रभावित है। रोजमर्रा के काम के लिए ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ और गंडक नदी के कटाव ने पूरे गांव की सामान्य जिंदगी को प्रभावित कर दिया है।
पंचायत को बाढ़ग्रस्त घोषित करने की मांग
जल सत्याग्रह के दौरान ग्रामीणों ने सिसवा मंगलपुर पंचायत को तत्काल बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से पंचायत के लोग बाढ़ और जलजमाव से परेशान हैं, लेकिन उन्हें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के अनुरूप राहत और सरकारी सहायता का लाभ नहीं मिल रहा है।
ग्रामीणों ने बाढ़ से धान और गन्ने की फसल को हुए नुकसान का हवाला देते हुए खेतों का तत्काल सर्वे कराने और किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की। साथ ही गंडक नदी के कटाव से प्रभावित परिवारों का दोबारा सर्वे कर वास्तविक क्षति का आकलन करने और पीड़ितों को मुआवजा एवं सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
महादलित और भूमिहीन परिवारों को जमीन देने की मांग
ग्रामीणों ने सिसवा मंगलपुर के महादलित और भूमिहीन परिवारों को आवास के लिए भूमि उपलब्ध कराने की भी मांग की। उनका कहना है कि बाढ़ और कटाव के कारण कई परिवारों के सामने रहने का संकट पैदा हो गया है।
वहीं, आवागमन की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सिसवा मंगलपुर से बड़हरवा तक मुख्य सड़क का उच्चीकरण और सुदृढ़ीकरण कराने की मांग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का स्तर ऊंचा किए बिना हर साल होने वाले जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
गंडक कटाव रोकने के लिए स्थायी उपाय की मांग
गंडक नदी के लगातार हो रहे कटाव को लेकर ग्रामीणों में सबसे अधिक आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी लगातार गांव की जमीन को अपनी चपेट में ले रही है। कटाव के कारण कई परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल ठोस और स्थायी कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की, ताकि गांव और ग्रामीणों की जमीन को बचाया जा सके।
15 दिन का अल्टीमेटम, 23 सितंबर से आमरण अनशन की चेतावनी
धरना-प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने जिला प्रशासन, प्रखंड प्रशासन और सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 23 सितंबर से योगापट्टी प्रखंड मुख्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। बाढ़, कटाव, सड़क, फसल क्षति और भूमिहीन परिवारों की समस्याओं का स्थायी समाधान करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
13 हजार से घटकर करीब 7 हजार रह गई आबादी
ग्रामीणों ने सिसवा मंगलपुर की लगातार बदलती स्थिति पर चिंता जताई। उनका दावा है कि गांव की आबादी पहले करीब 13 हजार थी, जो बाढ़, कटाव और लगातार हो रहे विस्थापन के कारण अब घटकर लगभग 7 हजार रह गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, बड़ी संख्या में परिवार गांव छोड़कर दूसरे स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते गंडक नदी के कटाव और बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है तथा गांव की आबादी में और गिरावट आ सकती है।
बड़ी संख्या में ग्रामीण हुए शामिल
जल सत्याग्रह और धरना-प्रदर्शन में कल्याण सिंह बिन्द, कृष्ण कुमार बिन्द, नगीना यादव, शंभु मुखिया, चंदन माझी, संजय चौधरी, प्रभु मुखिया, सुरेंद्र यादव, फूलकली देवी, सोहन माझी, जायकिशुन मुखिया, सुरेश माझी, लोरीक माझी, मदन मुखिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
बेतिया से संतोष की रिपोर्ट