Bihar news : पश्चिम चंपारण में एक बार फिर सवाल कानून पर नहीं, सिस्टम की सोच पर उठ रहे हैं। मामला साठी थाना क्षेत्र का है, जहां CISF में तैनात एक दारोगा पर नाबालिग लड़की के अपहरण का आरोप लगा है। लड़की के पिता ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है, लेकिन पूरे मामले में जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं, उसने गांव से लेकर जिले तक हलचल मचा दी है। सवाल ये है कि आखिर वर्दी का रौब इतना बड़ा हो गया है कि कोई खुलेआम कहे— “प्रशासन हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता”?
पीड़िता के पिता संतोष कुमार मिश्रा ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि उनकी बेटी बेतिया के बानूछापर कृष्णा नगर में किराये के कमरे में रहकर पढ़ाई करती थी। परिवार ने उसे पढ़ने भेजा था, सपने पूरे करने भेजा था, लेकिन अब वही बेटी अचानक गायब है। आरोप है कि गांव के ही प्रमोद ठाकुर के पुत्र धामू ठाकुर ने उसका अपहरण कर लिया।
परिवार का कहना है कि लड़की ने फोन पर खुद बताया था कि धामू ठाकुर उसे अपने साथ ले गया है। इसके बाद मोबाइल बंद हो गया और संपर्क पूरी तरह टूट गया। अब सवाल ये है कि अगर लड़की नाबालिग है, तो फिर इसे “प्रेम प्रसंग” कहकर हल्का करने की कोशिश क्यों हो रही है? क्या हर मामले में सिस्टम पहले लड़की के चरित्र का पोस्टमार्टम करता है और बाद में कानून की किताब खोलता है?
इतना ही नहीं, पीड़िता के पिता ने यह भी आरोप लगाया है कि 24 मई की शाम आरोपी पक्ष के लोग हथियार लेकर उनके घर पहुंचे। लाठी, डंडा, फरसा और भाला लेकर धमकी दी गई कि अगर पुलिस में गए तो अंजाम बुरा होगा। गांव में दहशत फैल गई। परिवार का आरोप है कि धमकी देने वालों ने साफ कहा कि धामू ठाकुर CISF में दारोगा है, देहरादून में पोस्टेड है और उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
अब यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी नौकरी और वर्दी किसी को कानून से ऊपर बना देती है? बताया जा रहा है कि आरोपी CISF में पुलिस अवर निरीक्षक के पद पर कार्यरत है। वहीं पुलिस फिलहाल मामले को प्रेम प्रसंग के एंगल से भी देख रही है। लेकिन अगर लड़की नाबालिग है तो उसकी सहमति का सवाल ही नहीं उठता। फिर आखिर जांच में फुर्ती क्यों दिखाई नहीं दे रही है?
गांव में लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। कोई कह रहा है कि मामला दबाने की कोशिश होगी, तो कोई कह रहा है कि वर्दी का प्रभाव जांच पर भारी पड़ सकता है। लेकिन सबसे बड़ा दर्द उस परिवार का है जिसकी बेटी लापता है और जो अब इंसाफ के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
इस घटना ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। और सबसे अहम सवाल—अगर एक नाबालिग लड़की सुरक्षित नहीं है, तो आखिर सिस्टम किसकी सुरक्षा का दावा करता है? फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन इलाके के लोग का कहना है की वह अब कार्रवाई नहीं, नतीजा देखना चाहते हैं।