एक तरफ लाखों के पैकेज वाली नौकरी, दूसरी तरफ सिविल सेवा का सपना. बेतिया के अभिनव कुमार ने नौकरी को छोड़कर अपने लक्ष्य पर फोकस करने का फैसला लिया. बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा लेने के बजाय सेल्फ स्टडी से तैयारी जारी रखी और आखिरकार 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर DSP का पद प्राप्त किया. अभिनव ने 292वीं मेधा रैंक हासिल की है. खास बात यह है कि DSP बनने के बाद भी उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं बदला है और अब IAS बनने की तैयारी में जुटे हैं.
बेतिया के पिउनी बाग के रहने वाले अभिनव कुमार के पिता अनिल कुमार राव सेवानिवृत्त डाकपाल हैं, जबकि मां उषा राव गृहिणी हैं. चार संतानों वाले परिवार में अभिनव इकलौते बेटे हैं. 70वीं BPSC में सफलता मिलने के बाद उनके परिवार में खुशी का माहौल है. रिश्तेदारों, दोस्तों और शुभचिंतकों की ओर से उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं.
इंजीनियरिंग के बाद अमेरिकी कंपनी में मिली नौकरी
अभिनव ने बेतिया के संत जेवियर हायर सेकेंडरी स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई की. इसके बाद बोकारो के अयप्पा पब्लिक स्कूल से इंटरमीडिएट किया. आगे उन्होंने बेंगलुरु से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री हासिल की.
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उन्हें एक अमेरिकी कंपनी में नौकरी मिली. वर्ष 2020 से 2022 तक उन्होंने करीब 18 लाख रुपये सालाना पैकेज पर काम किया.
कोरोना काल के दौरान अभिनव वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे. बाद में कंपनी की ओर से ऑफिस ज्वाइन करने का दबाव बढ़ा तो उन्होंने नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी को पूरा समय देने का फैसला किया.
इसके बाद पिछले करीब चार वर्षों से वह UPSC की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने दो बार UPSC परीक्षा भी दी, लेकिन अंतिम चरण में सफलता नहीं मिल सकी. इसके बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी और अपने लक्ष्य पर काम करते रहे.
अभिनव ने अपनी तैयारी का बड़ा हिस्सा सेल्फ स्टडी के जरिए किया. UPSC में सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने प्रयास जारी रखा. इसी दौरान माता-पिता की सलाह पर उन्होंने BPSC परीक्षा में शामिल होने का फैसला किया.
70वीं BPSC संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में उनकी मेहनत रंग लाई. अभिनव ने 292वीं मेधा रैंक हासिल की और उनका चयन बिहार पुलिस में DSP के पद के लिए हो गया.
BPSC से DSP पद पर चयन अभिनव के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन वह इसे अपनी अंतिम मंजिल नहीं मानते. उनका अगला लक्ष्य UPSC पास कर IAS बनना है.
अभिनव का कहना है कि DSP के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाने के साथ वह UPSC की तैयारी भी जारी रखेंगे. नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी शुरू करने से लेकर BPSC में सफलता हासिल करने तक का उनका सफर उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बीच सेल्फ स्टडी से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.