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05-Apr-2026 12:33 PM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के बेतिया जिले के चनपटिया प्रखंड अंतर्गत खेरवा टोला चूहड़ी गांव में शनिवार की देर रात भीषण आगलगी की घटना ने तबाही मचा दी। आधी रात के सन्नाटे में अचानक उठी आग की लपटों ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। इस भयावह घटना ने दर्जनों परिवारों को पलभर में बेघर कर दिया।
बताया जा रहा है कि रात के समय जब अधिकांश ग्रामीण अपने-अपने घरों में सो रहे थे, तभी अचानक एक घर से आग की लपटें उठती दिखीं। देखते ही देखते आग ने आसपास के घरों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया। तेज हवा के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और कुछ ही देर में कई घर धू-धू कर जलने लगे। आग की लपटें इतनी भयानक थीं कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
ग्रामीणों के बीच चीख-पुकार मच गई। लोग अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों को लेकर किसी तरह घरों से बाहर भागे। कई लोग अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन आग की तीव्रता के सामने उनके प्रयास कमजोर पड़ गए। चारों ओर धुआं, आग और अफरा-तफरी का मंजर था।
घटना की सूचना तत्काल दमकल विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद काफी देर में आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक करीब तीन दर्जन घर पूरी तरह जलकर राख हो चुके थे। घरों में रखा अनाज, कपड़े, जरूरी सामान और अन्य घरेलू वस्तुएं सबकुछ जलकर खाक हो गया।
इस आगलगी की घटना में कई मवेशियों के भी जलकर मरने की सूचना है, जिससे ग्रामीणों को दोहरा नुकसान हुआ है। जिन परिवारों की रोजी-रोटी का आधार यही मवेशी थे, उनके सामने अब जीविका का संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आग लगने की शुरुआती वजह मच्छरों से बचाव के लिए मवेशियों के पास जलाए गए धुएं को माना जा रहा है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।
घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। जिन परिवारों के घर जल गए, वे अब खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। महिलाएं और बच्चे सहमे हुए हैं और अपने उजड़े आशियाने को देख भावुक हो रहे हैं।
प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही है। पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने की बात कही जा रही है। वहीं ग्रामीणों ने सरकार से मुआवजे और पुनर्वास की मांग की है, ताकि वे फिर से अपने जीवन को पटरी पर ला सकें।