Bihar Crime News: बिहार के नालंदा जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों, विश्वास और इंसानियत—तीनों को शर्मसार कर दिया है। अस्थावां थाना क्षेत्र के चूलीहारी गांव में एक सगी मौसी ने ही अपनी बहन के एक वर्षीय मासूम बेटे की हत्या कर दी। मामूली मोबाइल फोन खोने के विवाद और अंधविश्वास की आग में एक मासूम जिंदगी बुझा दी गई। जिस घर में शादी की खुशियां गूंज रही थीं, वहां अब सिर्फ मातम, चीखें और सन्नाटा है।


मृतक बच्चे की पहचान कारू कुमार के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी राजू पासवान का एक वर्षीय पुत्र था। उसकी मां आरती देवी अपने भाई दिलखुश पासवान की शादी में शामिल होने मायके आई थीं। 21 अप्रैल को घर में शादी का उत्सव था, मेहमान जुटे थे, गीत-संगीत चल रहा था। इसी बीच रात में अचानक मासूम कारू रहस्यमय तरीके से गायब हो गया।


परिजनों के अनुसार, घटना की जड़ में एक मोबाइल फोन का गायब होना था। बताया जा रहा है कि आरती देवी की बड़ी बहन सुमंत्री देवी का मोबाइल फोन कहीं खो गया था। सुमंत्री को शक था कि उसकी मंझली बहन आरती ने मोबाइल लिया है। इसी बात को लेकर दोनों बहनों के बीच तीखी बहस हुई और घर का माहौल तनावपूर्ण हो गया।


हैरानी की बात यह रही कि मोबाइल ढूंढ़ने के लिए परिवार ने तर्क और समझदारी के बजाय अंधविश्वास का सहारा लिया। गांव की एक महिला, जो खुद को आध्यात्मिक शक्ति से जुड़ा बताती थी, उससे जल अभिमंत्रित कराया गया। उस जल को पूरे घर में छिड़का गया और परिवार के सदस्यों को पिलाया गया, ताकि “चोर” का पता चल सके।


इसी अंधविश्वासी माहौल के बीच साजिश ने खौफनाक रूप ले लिया। रात करीब 10 बजे जब आरती देवी की नींद खुली, तो उन्होंने देखा कि उनका मासूम बेटा बिस्तर पर नहीं है। पहले परिवार ने सोचा कि बच्चा घर में कहीं होगा, लेकिन काफी तलाश के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला, तो हड़कंप मच गया। चूंकि घर के सभी दरवाजे भीतर से बंद थे, इसलिए बाहरी व्यक्ति के शामिल होने की आशंका कम हो गई।


घंटों खोजबीन के बाद घर के पास स्थित तालाब में जब तलाश की गई, तो वहां जो दृश्य सामने आया उसने सभी को झकझोर दिया। तालाब में मासूम कारू का शव तैरता मिला। मां आरती देवी बेटे का शव देखकर बेसुध हो गईं। पूरे गांव में मातम छा गया और शादी वाला घर चीख-पुकार से भर उठा।


मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्थावां थाना पुलिस तुरंत सक्रिय हुई। थानाध्यक्ष उत्तम कुमार के नेतृत्व में जांच शुरू की गई। संदेह की सुई बड़ी मौसी सुमंत्री देवी पर गई, जिसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस की सख्त पूछताछ में सुमंत्री टूट गई और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।