Bihar Land Mutation Case: नालंदा के राजगीर के तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) संतोष कुमार चौधरी के खिलाफ बिहार सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड दिया है।
रेलवे, जिला परिषद, धार्मिक न्यास परिषद से निबंधित मठों की जमीन और लंबित स्वत्व वाद से जुड़ी भूमि की कथित तौर पर अवैध तरीके से दाखिल-खारिज और जमाबंदी कायम करने के मामले में यह कार्रवाई की गई है। सरकार के इस फैसले के बाद राजगीर के प्रशासनिक महकमे से लेकर आम लोगों के बीच यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।
आरोप है कि संतोष कुमार चौधरी राजगीर में पदस्थापन के दौरान गलत तरीके से दाखिल-खारिज और जमाबंदी कायम करने के आरोप में जेल भी जा चुके हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी शशांक शुभंकर के आदेश पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके बाद जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया था। अब विभागीय कार्रवाई के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड दिए जाने से यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।
स्थानीय जानकारों के मुताबिक, राजगीर में रेलवे, जिला परिषद, नगर परिषद और धार्मिक न्यास परिषद से जुड़ी मठ-मंदिरों की जमीन के साथ-साथ मलमास मेला सैरात भूमि की दाखिल-खारिज और जमाबंदी का मामला लंबे समय से विवादों में रहा है। उनका दावा है कि सरकारी, सार्वजनिक और धार्मिक महत्व की जमीनों की गलत तरीके से जमाबंदी के मामले केवल संतोष कुमार चौधरी के कार्यकाल तक सीमित नहीं रहे हैं। उनके पहले और बाद में पदस्थापित कई अंचल अधिकारियों के कार्यकाल में भी इस तरह के मामले सामने आने की बात कही जा रही है।
ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि यदि अन्य अधिकारियों के कार्यकाल में भी इस तरह की गड़बड़ियां हुई हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या पूरे मामले की व्यापक स्तर पर जांच की गई है या कार्रवाई केवल एक अधिकारी तक सीमित रही है?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि गलत दाखिल-खारिज और जमाबंदी के लिए क्या केवल अंचल अधिकारी ही जिम्मेदार होते हैं? दरअसल, दाखिल-खारिज की अनुशंसा, जमीन से जुड़े अभिलेखों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया में राजस्व कर्मचारियों और अंचल निरीक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
ऐसे में जब अंतिम आदेश जारी करने वाले अंचल अधिकारी के खिलाफ अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसी कार्रवाई हुई है, तो संबंधित राजस्व कर्मचारियों और अंचल निरीक्षकों की भूमिका और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का जानना है कि क्या इस मामले में उनकी भूमिका की जांच हुई और यदि हुई तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?
राजगीर के स्थानीय लोगों के बीच अब मांग उठ रही है कि सरकारी, सार्वजनिक और धार्मिक न्यास की जमीनों पर गलत तरीके से कायम की गई दाखिल-खारिज और जमाबंदी की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, जांच में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आए, उनके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
संतोष कुमार चौधरी के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद अन्य अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मियों के बीच भी जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि यह कार्रवाई किसी एक अधिकारी तक सीमित न रहे, बल्कि सरकारी और सार्वजनिक जमीनों से जुड़े सभी संदिग्ध मामलों की जांच का आधार बने।