MUZAFFARPUR:मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच के डेंटल ओपीडी-11 में इलाज कराने पहुंचे एक मरीज से जबड़े के ऑपरेशन के एवज में 10 हजार रुपये मांगने का आरोप लगा है। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में एक महिला चिकित्सक ओपीडी में बैठकर मरीज के जबड़े का ऑपरेशन कर उसमें तार लगाने के लिए 10 हजार रुपये खर्च होने की बात कहती नजर आ रही हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है और ना ही फर्स्ट बिहार इस वायरल वीडियो की पुष्टि करता है।
बताया जा रहा है कि यह वीडियो गुरुवार का है। सीतामढ़ी जिले के कमलदह निवासी रामबली सिंह के पुत्र सुजीत कुमार इलाज के लिए एसकेएमसीएच की डेंटल ओपीडी पहुंचे थे। वहां मौजूद चिकित्सक ने उनके दांत से संबंधित चिकित्सीय परामर्श दिया। इसी दौरान चिकित्सक ने सुजीत के जबड़े में खराबी बताते हुए ऑपरेशन कर तार लगाने की जरूरत बताई।
आरोप है कि चिकित्सक ने पहले मरीज को बताया कि यह सुविधा एसकेएमसीएच में उपलब्ध नहीं है। इसके बाद कथित तौर पर 10 हजार रुपये खर्च करने पर एसकेएमसीएच में ही यह सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई।
मरीज सुजीत कुमार ने मामले से संबंधित हिडन कैमरे से बनाया गया कथित वीडियो एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद को सौंपा है। अधीक्षक ने बताया कि मरीज या उसके परिजनों की ओर से अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। हालांकि, वीडियो मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने अपने स्तर से मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।
अधीक्षक ने डेंटल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पांशु से मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा कि विभाग में होने वाली किसी भी तरह की लापरवाही के लिए विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी तय होगी।
डॉ. महेश प्रसाद ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसकेएमसीएच में उपलब्ध सभी सुविधाएं मरीजों को नियमानुसार मिलनी चाहिए। यदि कोई सुविधा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, तो अस्पताल परिसर में बैठकर उसके नाम पर मरीज से पैसे लेकर एसकेएमसीएच में सुविधा उपलब्ध कराने का दावा नहीं किया जा सकता।
वहीं, मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि पहले ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की गई होती तो मरीजों से इलाज के नाम पर पैसे मांगने की स्थिति नहीं बनती। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल अस्पताल प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस मामले में कौन दोषी है।