Muzaffarpur Hospital Fire: मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में हुए अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। प्रशासन ने प्रसाद हॉस्पिटल को खाली कराने के साथ उसके एक हिस्से को सील कर दिया है। वहीं, जिले के अन्य निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की भी सघन जांच की जा रही है। अब तक 12 नर्सिंग होम को सील किया जा चुका है।


जिला प्रशासन द्वारा गठित विशेष टीम ने एसकेएमसीएच के आसपास संचालित करीब एक दर्जन अवैध नर्सिंग होम में जांच के बाद ताला लगा दिया है। जांच के दौरान निजी अस्पतालों में कार्यरत सरकारी डॉक्टरों की भूमिका भी सामने आ रही है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।


सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने शनिवार को बताया कि प्रसाद हॉस्पिटल के एक हिस्से को सील कर मामले की जांच जारी है। अस्पताल प्रबंधन का बयान दर्ज किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


प्रसाद हॉस्पिटल से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय, पटना को भेज दिए गए हैं। विभाग ने अस्पताल में पंजीकृत बेडों की संख्या, आईसीयू और सीसीयू बेड की जानकारी तथा घटना के समय भर्ती मरीजों का विवरण मांगा था। इसके अलावा क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत लाइसेंस के नवीनीकरण संबंधी जानकारी भी तलब की गई थी। स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई रिपोर्ट में अस्पताल की अग्निशमन व्यवस्था का विवरण भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में पिछले वर्ष जुलाई माह में मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी।


प्रसाद हॉस्पिटल में कार्यरत एक सरकारी डॉक्टर के खिलाफ सिविल सर्जन ने जांच समिति गठित की है। उक्त डॉक्टर को लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार भी किया जा चुका है। वह बंदरा पीएचसी में पदस्थापित हैं। सरकारी सेवा में रहते हुए निजी अस्पताल में काम करने के मामले में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। सूत्रों के अनुसार, प्रसाद हॉस्पिटल में एसकेएमसीएच के कई डॉक्टर भी सेवाएं दे रहे थे, जिनमें विभिन्न विभागों के अध्यक्ष स्तर के चिकित्सक भी शामिल थे।


प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद उससे संबद्ध नर्सिंग कॉलेज भी जांच के दायरे में आ गया है। स्वास्थ्य विभाग कॉलेज के लाइसेंस, मान्यता और सीटों से संबंधित सभी फाइलों की समीक्षा कर रहा है। यह जांच की जाएगी कि कॉलेज को कब मान्यता मिली और कितनी सीटों की स्वीकृति दी गई थी। विभाग को शिकायत मिली है कि कॉलेज में निर्धारित सीटों से अधिक छात्रों का नामांकन किया जा रहा है। इसके अलावा कॉलेज के लाइसेंस नवीनीकरण, अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था और भवन के स्वीकृत नक्शे की भी जांच की जाएगी।