MUZAFFARPUR: मुजफ्फरपुर में हुए पप्पू सहनी एनकाउंटर को लेकर अब मामला राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। मुकेश सहनी ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। वे सैकड़ों समर्थकों के साथ हाथों में काली पट्टी बांधकर मुजफ्फरपुर एसएसपी कार्यालय पहुंचे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।


क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, 17 फरवरी को बेला पुलिस थाना क्षेत्र में यह घटना हुई थी। पुलिस टीम एटीएम फ्रॉड गिरोह के मुख्य आरोपी पप्पू सहनी को गिरफ्तार करने गई थी। इसी दौरान आरोप है कि बदमाशों ने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें एएसआई विकास कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में पप्पू सहनी के बाएं पैर में गोली लगी। उसे गिरफ्तार कर अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।


आरोपी का आपराधिक इतिहास

मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा के अनुसार, पप्पू सहनी पर उत्तर बिहार के कई जिलों में एटीएम फ्रॉड के कई मामले दर्ज थे। वह अपने भाई पंकज सहनी के साथ मिलकर “पंकज मैनेजमेंट कंपनी” की आड़ में साइबर ठगी करता था और हथियारों की तस्करी में भी शामिल था। पुलिस ने घटनास्थल से हथियार और कई एटीएम कार्ड भी बरामद किए हैं।


राजनीतिक घमासान

जहां पुलिस इस कार्रवाई को आत्मरक्षा में किया गया एनकाउंटर बता रही है, वहीं मुकेश सहनी इसे एक सोची-समझी साजिश करार दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर एसएसपी से बातचीत हुई है और एक महीने के भीतर पूरे मामले की जांच कर प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सच्चाई सामने लाने की मांग की गई है। एसएसपी कार्यालय के बाहर वीआईपी समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासन से जवाब देने की मांग की।