Bihar News: मुजफ्फरपुर जिले के औराई थाना क्षेत्र के जनार पंचायत के बेदौल गांव के कोन्हा टोला में रविवार दोपहर दर्दनाक हादसा हो गया। गांव से करीब 500 मीटर दूर गहरे गड्ढे में नहाने के दौरान तीन किशोर डूब गए। हादसे में दो की मौत हो गई, जबकि तीसरे की हालत गंभीर बनी हुई है। उसका इलाज एसकेएमसीएच में चल रहा है।
मृतकों की पहचान बेदौल कोन्हा टोला निवासी रविंद्र राय के 12 वर्षीय पुत्र विकास कुमार और सुरेंद्र राय के करीब 9 वर्षीय पुत्र सत्यम कुमार के रूप में हुई है। वहीं, देवेंद्र राय के 13 वर्षीय पुत्र रामानंद राय का एसकेएमसीएच में इलाज जारी है।
नहाने के दौरान गहरे पानी में डूबे तीनों
ग्रामीणों के अनुसार, घटना रविवार दोपहर करीब 12 बजे की है। छुट्टी के दिन तीनों बच्चे घरवालों की नजर बचाकर गांव से कुछ दूरी पर स्थित गड्ढे में नहाने चले गए थे। इसी दौरान तीनों एक-एक कर गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे।
खेत में काम कर रहे लोगों की नजर बच्चों पर पड़ी तो उन्होंने शोर मचाया। आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी प्रयास के बाद तीनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद परिजनों के साथ सभी को एसकेएमसीएच ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने विकास और सत्यम को मृत घोषित कर दिया। रामानंद का इलाज जारी है।
खेलते-खेलते नहाने चले गए थे बच्चे
मुखिया प्रतिनिधि रजनीश कुमार ने बताया कि तीनों बच्चे खेलते-खेलते गड्ढे में नहाने चले गए थे। इसी दौरान एक-एक कर तीनों गहरे पानी में डूब गए। घटना के बाद गांव में मातम पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मुखिया ने लगाया अवैध खनन का आरोप
पंचायत की मुखिया संगीता कुमारी ने आरोप लगाया कि पितौझिया सीमा क्षेत्र में एक चिमनी संचालक की ओर से सरकारी परती जमीन पर बेतरतीब तरीके से मिट्टी खनन कराया गया है। खनन के कारण वहां करीब 15 से 20 फीट गहरा गड्ढा बन गया है, जिसमें बारिश का पानी जमा हो गया था।
मुखिया के अनुसार, ग्रामीणों का कहना है कि उक्त जमीन पर गांव के ही एक व्यक्ति का कब्जा था और मिट्टी खनन के लिए चिमनी संचालक को जमीन दी गई थी। हालांकि, इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि होना बाकी है।
गहरे गड्ढों को सुरक्षित कराने की मांग
मुखिया ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और यदि अवैध खनन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसे गहरे गड्ढों में बारिश का पानी जमा होने के बाद बच्चों के लिए खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन को ऐसे स्थानों को चिह्नित कर सुरक्षित कराना चाहिए ।