Muzaffarpur Hospital Fire: बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुए भीषण अग्निकांड का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष पहुंच गया है। इस हादसे में अब तक पांच मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 15 से अधिक मरीज घायल हुए हैं। घायलों का इलाज विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में चल रहा है।


तड़के ICU में लगी थी आग

जानकारी के अनुसार, गुरुवार तड़के करीब 3 बजे ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल की चौथी मंजिल पर बने ICU में अचानक आग लग गई। उस समय ICU यूनिट में लगभग 25 मरीज भर्ती थे। आग लगते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और मरीजों व उनके परिजनों में चीख-पुकार शुरू हो गई।


कई परिजनों ने अपने रिश्तेदारों को बाहर निकाल लिया, लेकिन 15 से अधिक मरीज समय रहते बाहर नहीं निकल सके। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने के बाद मरीजों को सुरक्षित निकालकर एंबुलेंस के जरिए दूसरे अस्पतालों में भेजा गया।


मानवाधिकार आयोग में दायर हुई याचिका

मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस.के. झा ने इस घटना को गंभीर मानवीय त्रासदी बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली और राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना में याचिका दायर की है। अधिवक्ता ने मांग की है कि मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश (रिटायर्ड जज) की निगरानी में कराई जाए तथा दोषी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


एस.के. झा ने कहा कि लोग अपनी जान बचाने के लिए अस्पताल जाते हैं, लेकिन यदि अस्पताल में ही आग लगने से मरीजों की मौत हो जाए तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने राज्य के सभी निजी अस्पतालों का सुरक्षा मानकों के आधार पर फायर और सेफ्टी ऑडिट कराने की भी मांग की है।


सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। साथ ही जिला प्रशासन को घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।


जांच के लिए बनी पांच सदस्यीय समिति

नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह ने बताया कि डीएम के निर्देश पर घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कांतेश कुमार मिश्रा ने बताया कि फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम को भी जांच में लगाया गया है। जिस हिस्से में आग लगी थी, उसे सील कर दिया गया है और अस्पताल संचालक व प्रबंधन से पूछताछ की जा रही है। 


एसएसपी ने स्पष्ट किया कि जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद जिलाधिकारी ने जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।