Bihar News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के पानापुर करियात थाना में युवक को हिरासत में लेकर कथित रूप से बेरहमी से पिटाई करने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने तत्कालीन थानाध्यक्ष राजबल्लभ प्रसाद के खिलाफ 24 घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी, मुजफ्फरपुर के डीएम और एसएसपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
मामला सरैया थाना क्षेत्र के बहिलवारा रुपनाथ गांव निवासी अमन कुमार से जुड़ा है। आरोप है कि 11 मार्च 2025 की सुबह करीब 3 बजे तत्कालीन थानाध्यक्ष राजबल्लभ प्रसाद ने अमन कुमार को कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया था।
अमन कुमार की गिरफ्तारी की जानकारी मिलने पर उनके बहनोई रौशन प्रताप सिंह पानापुर करियात थाना पहुंचे। आरोप है कि थाना परिसर में अमन कुमार को बंद रखा गया था। रौशन प्रताप सिंह के अनुसार, थानाध्यक्ष ने अमन कुमार को छोड़ने के बदले एक लाख रुपये की मांग की। विरोध करने पर रौशन प्रताप सिंह को भी हाजत में बंद कर दिया गया और उनके हाथ-पैर व मुंह बांधकर कथित रूप से बुरी तरह पीटा गया।
परिजनों का आरोप है कि बाद में परिवार के अन्य सदस्य जब थाना पहुंचे और दोनों को छोड़ने की गुहार लगाई, तब पुलिस की ओर से एक लाख रुपये की मांग की गई। कथित तौर पर 70 हजार रुपये लेने के बाद दोनों को छोड़ा गया। इसके अलावा रौशन प्रताप सिंह की अपाचे मोटरसाइकिल भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले ली और उसे लौटाने के लिए 30 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग की गई। मारपीट में गंभीर रूप से घायल रौशन प्रताप सिंह को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कांटी ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें एसकेएमसीएच रेफर कर दिया गया।
मामला बाद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और बिहार मानवाधिकार आयोग (बीएचआरसी) तक पहुंचा। आयोग ने इसे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला मानते हुए बिहार सरकार से पूछा है कि पीड़ित को एक लाख रुपये का मुआवजा क्यों नहीं दिया जाए। साथ ही संबंधित थानाध्यक्ष के खिलाफ अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने पर भी नाराजगी जताई गई है।
आयोग की कार्रवाई के बाद पानापुर करियात थाना की ओर से रविवार को रौशन प्रताप सिंह की मां वीणा सिंह को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर आवेदन देने को कहा गया। इसके बाद वीणा सिंह ने तत्कालीन थानाध्यक्ष राजबल्लभ प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए थाना में आवेदन सौंपा।
मानवाधिकार मामलों के जानकार अधिवक्ता एस.के. झा ने कहा कि यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि एक प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पीड़ित परिवार को पटना से लेकर दिल्ली तक संघर्ष करना पड़ा। फिलहाल मामला एनएचआरसी और बीएचआरसी में विचाराधीन है और उन्हें उम्मीद है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।