Muzaffarpur Missing Girls News: मुजफ्फरपुर शहर में किशोरियों और युवतियों के लापता होने और अपहरण से जुड़े मामलों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. बीते सात महीनों में शहर के सात प्रमुख थाना क्षेत्रों में अपहरण और गुमशुदगी से जुड़े 343 मामले दर्ज किए गए हैं. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन आंकड़ों को देखें तो शहर में औसतन हर 15 घंटे में एक नया मामला पुलिस तक पहुंच रहा है.


इन मामलों ने शहर में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं. वहीं, बढ़ते मामलों के बीच पुलिस के सामने लापता किशोरियों और युवतियों को तलाश कर सुरक्षित बरामद करने की चुनौती भी बनी हुई है.


अहियापुर में सबसे ज्यादा मामले

पुलिस से मिले आंकड़ों के अनुसार, शहर के थाना क्षेत्रों में अहियापुर में सबसे अधिक मामले दर्ज हुए हैं. सात महीने के दौरान यहां अपहरण और गुमशुदगी से जुड़े 128 केस दर्ज किए गए हैं. आंकड़ों के लिहाज से अहियापुर शहर का सबसे अधिक प्रभावित थाना क्षेत्र है.


इसके बाद नगर थाना क्षेत्र में 68, ब्रह्मपुरा में 49, सदर में 37, काजी मोहम्मदपुर में 34 और सिकंदरपुर में 24 मामले दर्ज किए गए हैं. बेला थाना क्षेत्र में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं.


सात थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों का आंकड़ा


बहला-फुसलाकर ले जाने से लेकर शादी का झांसा देने तक के आरोप

दर्ज मामलों में परिजनों की ओर से कई तरह के आरोप लगाए गए हैं. कुछ मामलों में किशोरी या युवती को बहला-फुसलाकर ले जाने, शादी का झांसा देने या जबरन अपहरण करने की शिकायत पुलिस से की गई है.


हालांकि, पुलिस की जांच आगे बढ़ने पर कई मामलों में तस्वीर अलग सामने आती है. जांच के दौरान प्रेम-प्रसंग, अपनी मर्जी से घर छोड़ने या परिवार की इच्छा के खिलाफ शादी करने जैसी वजहें भी सामने आती हैं.


पुलिस इन मामलों में केवल अपहरण के आरोप तक सीमित नहीं रहकर हर संभावित पहलू की जांच कर रही है. कुछ मामलों में मानव तस्करी और संगठित गिरोह की भूमिका की आशंका को भी जांच के दायरे में रखा जा रहा है.


मोबाइल लोकेशन और CCTV से तलाश

मामलों की जांच में पुलिस तकनीकी संसाधनों का भी इस्तेमाल कर रही है. लापता किशोरियों और युवतियों की तलाश के लिए मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच की जा रही है.


जांच के दौरान कई मामलों में लापता लड़कियों की लोकेशन बिहार के दूसरे जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों में भी मिली है. ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस की मदद से संबंधित स्थानों पर कार्रवाई कर बरामदगी की कोशिश की जाती है.


बालिग युवतियों की बरामदगी के बाद उनके बयान न्यायालय में दर्ज कराए जाते हैं. वहीं, नाबालिगों से जुड़े मामलों में पॉक्सो एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है.


सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने कहा कि किशोरी या युवती के गुमशुदा या अपहृत होने की सूचना मिलते ही पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू करती है. उन्होंने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता लापता लड़की की सकुशल बरामदगी है.


सिटी एसपी के अनुसार, पुराने और नए मामलों में पुलिस ने बड़ी संख्या में युवतियों को बरामद किया है. जांच के दौरान कई मामलों में यह भी सामने आया कि युवतियां प्रेम-प्रसंग के कारण अपनी इच्छा से घर छोड़कर चली गई थीं.