Bihar Cyber Fraud News: मुजफ्फरपुर में जीविका दीदियों के नाम पर करोड़ों रुपये के ऋण का मामला सामने आया है. आरोप है कि मुशहरी और बोचहां प्रखंड की सौ से अधिक जीविका दीदियों से सादे कागज पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए और उनके नाम पर बैंक से ऋण की राशि एक कंपनी को भेज दी गई. अब दीदियों पर उस कर्ज की जिम्मेदारी आ गई है, जिसकी राशि उन्हें मिली ही नहीं.


मामला जक्ष ग्रेविटी एग्रो एनर्जी कंपनी से जुड़ा है. कंपनी को मुशहरी और बोचहां में मशरूम हट तैयार करने के लिए काम देने की बात सामने आई थी. खास बात यह है कि जीविका के अधिकारियों के अनुसार कंपनी को यह काम किसी लिखित आदेश के बजाय मौखिक निर्देश पर दिया गया था.


बैंक से सीधे कंपनी को भेजी गई रकम

बताया जा रहा है कि लखपति बनने और अपना काम शुरू करने का सपना देखने वाली जीविका दीदियों के नाम पर बैंक से ऋण स्वीकृत कराया गया. इसके बाद ऋण की राशि सीधे जक्ष ग्रेविटी एग्रो एनर्जी के खाते में भेज दी गई. आरोप है कि करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का लोन दीदियों के नाम पर उठाया गया, लेकिन जमीन पर मशरूम हट का काम नहीं हुआ.


जीविका की ओर से एसडीओ पूर्वी को दिए गए जवाब में भी कंपनी को तकनीकी सहयोग देने के लिए मौखिक आदेश दिए जाने की बात कही गई है. अब इसी बिंदु को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं.


सादे कागज पर लिए गए दस्तखत और अंगूठे

आरोप है कि कंपनी के निदेशक आशुतोष मंगलम ने जीविका दीदियों से सादे कागज पर दस्तखत और अंगूठे के निशान लिए. इसके आधार पर उनके नाम पर ऋण की प्रक्रिया आगे बढ़ी और राशि कंपनी तक पहुंच गई. दीदियों का आरोप है कि उन्हें जिस काम और राशि का सपना दिखाया गया था, वह उन्हें नहीं मिला, लेकिन बैंक का कर्ज उनके नाम पर चढ़ गया.


मंगलम की गिरफ्तारी के बाद सामने आईं कई जानकारियां

कंपनी के निदेशक आशुतोष मंगलम की गिरफ्तारी के बाद मामले में कई और जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है. बताया गया है कि अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग कंपनियों के नाम से मशरूम हट के नाम पर राशि लेने का प्रयास किया गया. अब तक ऐसी पांच कंपनियों की जानकारी सामने आने की बात कही गई है. हालांकि, आरोप है कि इनमें से किसी कंपनी का काम जमीन पर नजर नहीं आया.


तीन साल तक चलता रहा मामला

मामले को लेकर यह भी बताया जा रहा है कि कंपनी के खिलाफ काम नहीं करने और राशि से जुड़ी ठगी के आरोप में दो प्राथमिकियां दर्ज होने के बाद भी मंगलम अधिकारियों के साथ बैठक करता रहा. इसके बावजूद उसके खिलाफ संबंधित स्तर पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं.


ऋण की राशि नहीं मिलने के बावजूद कर्जदार बनीं जीविका दीदियां अब अपने स्तर पर मामले को उठा रही हैं. आरोप है कि कर्ज का बोझ बढ़ने के कारण कई परिवार आर्थिक परेशानी में आ गए और कुछ दीदियों की बेटियों की शादी तक टालनी पड़ी.


दीदियां अब पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रही हैं. उनका सवाल है कि यदि कंपनी को काम देने का कोई लिखित आदेश नहीं था, तो उनके नाम पर ऋण की राशि कंपनी को किस आधार पर भेजी गई. मामले में जीविका से जुड़े पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात कही जा रही है.