Bihar Property Tax News: मुजफ्फरपुर नगर निगम क्षेत्र में संपत्ति कर की वसूली को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. निगम क्षेत्र के 173 सरकारी भवनों पर 17.83 करोड़ रुपये से अधिक का संपत्ति कर यानी सेवा शुल्क बकाया है. बकाएदारों की सूची शनिवार को निगम की स्टैंडिंग कमेटी के सामने रखी गई, जिसके बाद सरकारी भवनों से शत-प्रतिशत कर वसूली को लेकर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए.


बड़े बकाएदारों की सूची में कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय और संस्थान शामिल हैं. इनमें डीएम, एसएसपी, आईजी और डीआईजी कार्यालय के अलावा सोनपुर मंडल के डीआरएम, जिला शिक्षा पदाधिकारी, विद्युत अंचल-1 के अभियंता कार्यालय, एलएस कॉलेज और दूसरे सरकारी संस्थान शामिल हैं.


डीआरएम कार्यालय पर सबसे ज्यादा बकाया

निगम के आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा बकाया सोनपुर मंडल के डीआरएम कार्यालय पर है. यहां 3.55 करोड़ रुपये का संपत्ति कर बकाया है. दूसरे नंबर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी का कार्यालय है, जिस पर 2.63 करोड़ रुपये बकाया हैं. वहीं विद्युत अंचल-1 के अभियंता कार्यालय पर 2.20 करोड़ रुपये का बकाया दर्ज है.


इसके अलावा एलएस कॉलेज पर 86.51 लाख रुपये, आरडीएस कॉलेज पर 74.36 लाख रुपये, डाक महाध्यक्ष कार्यालय, गोशाला रोड पर 74.20 लाख रुपये और एमडीडीएम कॉलेज पर 74.36 लाख रुपये बकाया हैं.


एमआईटी के प्राचार्य कार्यालय पर 26.51 लाख रुपये का बकाया है. वहीं डीएम कार्यालय पर 10.23 लाख, एसएसपी कार्यालय पर 8.69 लाख और सेंट्रल जेल अधीक्षक के कार्यालय पर 7.45 लाख रुपये बकाया हैं.


सरकारी भवनों से 75 फीसदी सेवा शुल्क लेने का प्रावधान

प्रावधान के अनुसार सरकारी भवनों को कुल संपत्ति कर यानी होल्डिंग टैक्स का 75 प्रतिशत ही सेवा शुल्क के रूप में भुगतान करना होता है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में सरकारी भवनों पर लंबे समय से करोड़ों रुपये का बकाया जमा है.


बकाएदारों की सूची सामने आने के बाद निगम की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई. मेयर ने नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि सरकारी भवनों से शत-प्रतिशत बकाया वसूली के लिए जिलाधिकारी से समन्वय स्थापित किया जाए.


81 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य

मुजफ्फरपुर नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में होल्डिंग टैक्स के रूप में 81 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया है. वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में 1 अप्रैल से 30 जून के बीच निगम ने 18.71 प्रतिशत यानी 10.93 करोड़ रुपये की वसूली की है. निगम के अनुसार वसूली का आंकड़ा अब 12 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है.


अब निगम की नजर सरकारी भवनों पर जमा 17.83 करोड़ रुपये से अधिक के बकाये की वसूली पर है. सरकारी कार्यालयों और संस्थानों की लंबी सूची सामने आने के बाद निगम के सामने बकाया राशि वसूलना बड़ी चुनौती बनी हुई है.