MUZAFFARPUR: 10 साल पहले 13 मई 2016 को 2 लाख रुपये रंगेहाथ घूस लेते मुजफ्फरपुर के जिला योजना पदाधिकारी (DPO) ओम प्रकाश को निगरानी ने गिरफ्तार किया था। आज 6 मई 2026 को मुजफ्फरपुर निगरानी कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दशरथ मिश्रा की अदालत में डीपीओ ओम प्रकाश को दोषी ठहराया गया। आरोपित को तीन वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/-(दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। धारा-13(2) सह पठित धारा-13(1)(डी) में पाँच वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/-(दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने पर दो महीने का साधारण कारावास होगा।
आज दिनांक 06.05.2026 को श्री दशरथ मिश्रा, माननीय न्यायाधीश, निगरानी, मुजफ्फरपुर द्वारा अभियुक्त श्री ओम प्रकाश, सम्प्रति जिला योजना पदाधिकारी, जिला-मुजफ्फरपुर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) के तह्त निगरानी थाना कांड संख्या-52/2016 (विशेष वाद सं-25/2016) में दोषी ठहराया गया। यह मामला परिवादी दीपक कुमार पालड़ीवाल, पिता-स्व0 नारायण प्रसाद पालड़ीवाल, गा्रम-बबुआगंज, थाना-नगर, जिला-खगड़िया से अभियुक्त ओम प्रकाश, सम्प्रति जिला योजना पदाधिकारी, जिला-मुजफ्फरपुर द्वारा परिवादी से एकिकृत कार्य योजना के अन्तर्गत आपूर्ति किये गये डेस्क बेन्च से संबंधित विपत्र का भुगतान करने के एवज् में 2,00,000/-रूपया रिश्वत माॅंगने का आरोप लगाया गया।
जिसमें आरोपी को दिनांक-13.05.2016 को 2,00,000/- रूपया रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। इस मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता मुन्ना प्रसाद, पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा सटीक और समय पर आरोप-पत्र दायर किया गया। बिहार सरकार की ओर से श्री कृष्ण देव साह, विशेष लोक अभियोजक निगरानी, मुजफ्फरपुर ने प्रभावी तरीके से पैरवी की और आरोपी को दोष सिद्ध कराने में सफलता हासिल की।
ओम प्रकाश, सम्प्रति जिला योजना पदाधिकारी, जिला-मुजफ्फरपुर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 में तीन वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/-(दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। धारा-13(2) सह पठित धारा-13(1)(डी) में पाँच वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/-(दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने पर दो महीने का साधारण कारावास होगा। दोनों सजा साथ-साथ चलेगी। अब तक वर्ष 2026 में कुल 08 भ्रष्टाचार के मामले में न्यायालय द्वारा सजा सुनायी गई है। ये दोषसिद्ध की कार्रवाई श्री दशरथ मिश्रा, माननीय न्यायाधीश, निगरानी, मुजफ्फरपुर द्वारा की गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अभियोजन की कार्यवाही लगातार जारी है।