MUZAFFARPUR: मुजफ्फरपुर डीएम सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें धान एवं गेहूं अधिप्राप्ति (खरीद) कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। बैठक के दौरान कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और समितियों के खिलाफ कड़े रुख अख्तियार करते हुए जिलाधिकारी ने कई कड़े निर्देश जारी किए हैं।


धान अधिप्राप्ति और सीएमआर आपूर्ति की स्थिति: जिला सहकारिता पदाधिकारी द्वारा बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के अंतर्गत जिले में अब तक कुल *89,514.38 मैट्रिक टन* धान की अधिप्राप्ति की जा चुकी है।

 * इस अधिप्राप्त धान के समतुल्य कुल *61,478.497 मैट्रिक टन* सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) तैयार होना है।

 * इसके विरुद्ध अब तक *47,413.742 मैट्रिक टन* सीएमआर की आपूर्ति बिहार राज्य खाद्य निगम को की जा चुकी है।

 * अधिकारियों ने बताया कि गोदामों में जगह की भारी कमी होने के कारण सीएमआर की आपूर्ति में अपेक्षित गति नहीं आ पा रही है, जिससे लक्ष्य प्राप्ति में बाधा उत्पन्न हो रही है।


*लापरवाही पर गिरी गाज: वेतन स्थगित और स्पष्टीकरण के निर्देश : समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि कुछ प्रखंडों में सीएमआर आपूर्ति की स्थिति बेहद असंतोषजनक है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

 1. *मुरौल प्रखंड:* केवल 38.71% प्रगति

 2. *गायघाट प्रखंड:* केवल 51.44% प्रगति

 3. *कटरा प्रखंड:* केवल 58.92% प्रगति

इन प्रखंडों में वांछित प्रगति नहीं पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने जिला सहकारिता पदाधिकारी को निर्देश दिया कि इन तीनों संबंधित प्रखंडों के *सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों (BCCO) का वेतन तत्काल प्रभाव से स्थगित* किया जाए और उनसे इस लापरवाही के लिए स्पष्टीकरण (शो-कॉज) पूछा जाए।


30 जून तक शत-प्रतिशत आपूर्ति का लक्ष्य: जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सीएमआर आपूर्ति के लिए निर्धारित अंतिम तिथि *30 जून 2026* है। उन्होंने सभी सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि वे प्रतिदिन राइस मिलों और पैक्स/व्यापार मंडल समितियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित करें ताकि समय सीमा के भीतर शत-प्रतिशत सीएमआर की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, जिला सहकारिता पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि सीएमआर आपूर्ति में ढिलाई या लापरवाही बरतने वाले पैक्स और व्यापार मंडलों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

इसके अतिरिक्त, बिहार राज्य खाद्य निगम (BSFC), मुजफ्फरपुर के जिला प्रबंधक के प्रतिनिधि को निर्देशित किया गया कि वे अधिप्राप्त धान के समतुल्य सीएमआर प्राप्त करने की प्रक्रिया में तेजी लाएं। वे समय पर प्राप्त रिलीज ऑर्डर (RO) के अनुरूप अनाज का उठाव सुनिश्चित करें ताकि समितियों से सीएमआर प्राप्त करने के काम को गति दी जा सके।


स्टॉक में गड़बड़ी मिलने पर दर्ज होगी प्राथमिकी: बैठक में धान के सुरक्षित रख-रखाव और पारदर्शिता पर भी विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने सभी सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को आदेश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की समितियों में बचे हुए (अवशेष) धान का *नियमित रूप से भौतिक सत्यापन (Physical Verification)* करें। यदि भौतिक सत्यापन के दौरान कागजी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में किसी भी प्रकार का विचलन या गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित समिति के विरुद्ध तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाए।


गेहूं अधिप्राप्ति की समीक्षा और नए दिशा-निर्देश: बैठक के दूसरे चरण में गेहूं अधिप्राप्ति की प्रगति की समीक्षा की गई। जिला सहकारिता पदाधिकारी ने बताया कि मुजफ्फरपुर जिला के लिए गेहूं अधिप्राप्ति का संशोधित लक्ष्य *6,303 मैट्रिक टन* निर्धारित किया गया है।

 * इस लक्ष्य के विरुद्ध अब तक जिले की 40 समितियों द्वारा कुल 198 किसानों से *936.3 मैट्रिक टन गेहूं की खरीद* की जा चुकी है।

 * इसमें से 175 पात्र किसानों के बैंक खातों में भुगतान की राशि भी भेजी जा चुकी है।

गेहूं खरीद की धीमी रफ्तार को देखते हुए जिलाधिकारी ने जिला सहकारिता पदाधिकारी को निर्देश दिया कि वे सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों के माध्यम से *पंचायतों के लघु एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता* दें और उनसे आधारभूत स्तर पर गेहूं की खरीद सुनिश्चित कराएं। इसके साथ ही, अधिप्राप्त किए गए गेहूं को समितियों से उठाकर जल्द से जल्द राज्य खाद्य निगम के गोदामों में जमा कराने का भी आदेश दिया गया। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि गेहूं खरीद और जमा करने के कार्य में लापरवाही बरतने वाले पैक्स अध्यक्षों और सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।