Bihar Cyber Crime News: मुजफ्फरपुर में कोलकाता पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान मीनापुर थाना क्षेत्र के पिपराहा असली गांव निवासी अजय साव के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, आरोपी कोलकाता में किराए का मकान लेकर फर्जी कॉल सेंटर संचालित करता था और इसी के जरिए ब्रिटेन के नागरिकों से लाखों रुपये की साइबर ठगी की जाती थी.
पुलिस से बचने के लिए मुजफ्फरपुर में छिपा था आरोपी
जानकारी के अनुसार, अजय साव कोलकाता में फर्जी कॉल सेंटर चलाने के बाद पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए मुजफ्फरपुर आ गया था. वह सदर थाना क्षेत्र के भगवानपुर स्थित रूपकला नगर में एक किराए के मकान में रह रहा था. कोलकाता पुलिस की टीम ने 27 अगस्त की रात करीब 9:45 बजे उसके ठिकाने पर छापेमारी की और उसे गिरफ्तार कर लिया.
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के ठिकाने से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और संदिग्ध डायरियां बरामद की हैं. गिरफ्तारी के बाद अजय साव को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिली. इसके बाद कोलकाता पुलिस की टीम आरोपी को अपने साथ पश्चिम बंगाल ले गई.
वीओआईपी कॉल के जरिए ब्रिटेन के लोगों को बनाते थे निशाना
पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य इंटरनेट आधारित वॉयस ओवर आईपी यानी VoIP कॉल के जरिए ब्रिटेन के नागरिकों से संपर्क करते थे. कॉल के दौरान आरोपी खुद को ब्रिटेन की टेलीकॉम कंपनी ‘ह्यूमनमाइड’ का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को विश्वास में लेते थे.
तकनीकी सहायता के नाम पर करते थे ठगी
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य पीड़ितों को तकनीकी सहायता देने और टेलीकॉम सेवाओं को बेहतर करने का झांसा देते थे. इसके बाद उनके कंप्यूटर में रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन डाउनलोड कराया जाता था. एप्लिकेशन इंस्टॉल होने के बाद आरोपी पीड़ित के कंप्यूटर तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश करते थे.
इसके जरिए बैंकिंग से जुड़ी जानकारी, भुगतान कार्ड का विवरण और अन्य गोपनीय डाटा हासिल किया जाता था. पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम ऑनलाइन माध्यम से यूके के पेमेंट गेटवे में ट्रांसफर की जाती थी.
फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी से खुला गिरोह का राज
इस पूरे साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा 18 अगस्त को कोलकाता के करया थाना क्षेत्र के ओल्ड बालीगंज फर्स्ट लेन में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस की कार्रवाई के बाद हुआ था. छापेमारी के दौरान पुलिस ने फिरदौस इकबाल, एसके सज्जाद और रूपम तिमोथी बिश्वास को गिरफ्तार किया था.
इसके बाद 19 अगस्त को टालतला इलाके से राउटर और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के आरोप में शब्बीर को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की तो अजय साव का नाम सामने आया.
पूछताछ में सामने आया मास्टरमाइंड का नाम
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान अजय साव को इस साइबर ठगी नेटवर्क के मुख्य संचालक के रूप में चिह्नित किया गया. इसके बाद कोलकाता पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और तकनीकी जानकारी के आधार पर मुजफ्फरपुर में उसके ठिकाने का पता लगाया.
पुलिस अब अजय साव से पूछताछ कर गिरोह के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी की रकम कितनी है.
बिहार और पश्चिम बंगाल में अन्य सहयोगियों की तलाश
जांच के दौरान पुलिस को गिरोह के कई अन्य सहयोगियों के बिहार और पश्चिम बंगाल में सक्रिय होने की जानकारी मिली है. पुलिस इन आरोपियों की पहचान और भूमिका की जांच कर रही है. नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी भी की जा रही है.