Bihar Cyber Crime News: मुजफ्फरपुर में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जहां एक प्राइवेट बैंक कर्मचारी ही ठगों का सबसे बड़ा ‘सहयोगी’ बन बैठा। हैदराबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए बैंककर्मी विशाल वर्मा को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि वह फर्जी कंपनियों के नाम पर करेंट अकाउंट खोलकर साइबर अपराधियों को करोड़ों की ठगी करने का रास्ता देता था।
मामला सिर्फ एक-दो खातों का नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क का है। जांच में सामने आया है कि चार अलग-अलग फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले गए खातों में देशभर से ठगी की रकम जमा कराई जाती थी। इन खातों के जरिए करीब 2.47 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ, जो 70 अलग-अलग साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ा बताया जा रहा है।
ऐसे खुला ‘फर्जी खातों’ का खेल
हैदराबाद के एक केस की जांच के दौरान इस पूरे रैकेट का खुलासा हुआ। एक व्यवसायी की पत्नी से शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ठगी की गई थी। जब पुलिस ने पैसे के ट्रांजेक्शन को ट्रेस किया, तो रकम मुजफ्फरपुर के एक बैंक खाते में पहुंची। यहीं से जांच की कड़ी आगे बढ़ी और फर्जी कंपनियों के नाम पर खुले खातों का राज सामने आने लगा।
10 हजार में ‘सेट’ होता था पूरा सिस्टम
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि विशाल वर्मा हर फर्जी अकाउंट खोलने के बदले करीब 10 हजार रुपये लेता था। वह खुद ही इन खातों का सत्यापन करता था, जिससे बैंक की प्रक्रिया पूरी तरह ‘वैध’ दिखे। इसी भरोसे का फायदा उठाकर साइबर ठग करोड़ों की रकम इन खातों में मंगवाते और फिर तुरंत निकाल लेते थे।
मास्टरमाइंड शशांक का नेटवर्क
इस पूरे खेल के पीछे शशांक नाम का एक शातिर बताया जा रहा है, जिसने विशाल को अपने जाल में फंसाया। शशांक अलग-अलग लोगों के नाम पर फर्जी कंपनियां बनवाता और फिर उन्हीं के नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। खाते खुलने के बाद उनका कंट्रोल खुद शशांक के पास रहता था, जहां ठगी की रकम ट्रांसफर होती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़े लोगों को हर ट्रांजेक्शन पर मोटा कमीशन मिलता था। एक आरोपी ने बताया कि उसे 30 प्रतिशत तक कमीशन का लालच दिया गया था।
चार कंपनियां, 70 ठगी के केस
पुलिस के अनुसार, जिन चार कंपनियों के नाम पर खाते खोले गए, उनमें ‘खुशी इंटरप्राइजेज’, ‘भोलेशंकर इंटरप्राइजेज’, ‘फैशन वर्ल्ड’ और ‘ग्रीन लॉस्कर एडवाइजर प्राइवेट लिमिटेड’ शामिल हैं। इन खातों में अलग-अलग राज्यों से ठगी की रकम आई।
सिर्फ ‘ग्रीन लॉस्कर’ के खाते में ही 43 मामलों के करीब 1.68 करोड़ रुपये जमा हुए थे। बाकी खातों में भी लाखों की रकम आई, जिसे तुरंत निकाल लिया गया। इससे साफ है कि यह कोई छोटा मोटा फ्रॉड नहीं, बल्कि सुनियोजित साइबर क्राइम नेटवर्क था।
बैंक नौकरी की आड़ में बड़ा खेल
विशाल वर्मा ने अपने करियर की शुरुआत बेंगलुरु के एक निजी बैंक से की थी। बाद में वह मुजफ्फरपुर में आईडीएफसी बैंक में अकाउंट ओपनिंग और वेरिफिकेशन का काम देखने लगा। इसी पद का फायदा उठाकर उसने सैकड़ों खाते खोले, जिनमें से कई पर अब शक गहरा गया है।
पुलिस को आशंका है कि विशाल सिर्फ एक कड़ी है और उसके जरिए कई अन्य साइबर अपराधी भी बैंकिंग सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे थे।
आगे और बड़े खुलासे संभव
फिलहाल पुलिस ने विशाल को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां अब उन सभी खातों और ट्रांजेक्शन की गहराई से पड़ताल कर रही हैं, जिनसे यह नेटवर्क जुड़ा हो सकता है।