MUZAFFARPUR: मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड परिसर स्थित गोदाम में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए चावल वितरण के दौरान उसकी गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं ने चावल खराब होने का आरोप लगाते हुए वितरण का विरोध किया और कई सेविकाओं ने चावल लेने से इनकार कर दिया।


शाहपुर मरीचा पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 248 की सेविका प्रेमा कुमारी ने आरोप लगाया कि गोदाम से दिए जा रहे चावल में सड़न के साथ-साथ कीड़े भी दिखाई दे रहे थे। उनका कहना है कि इस चावल का इस्तेमाल छोटे बच्चों के पोषण आहार के रूप में किया जाना है। ऐसे में यदि चावल खराब है तो इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। सेविका ने बताया कि उन्होंने मामले की जानकारी सीडीपीओ, कुढ़नी को भी दी है।


खराब चावल को लेकर सेविकाओं का विरोध

चावल की स्थिति देखकर मौके पर मौजूद सेविकाओं में नाराजगी फैल गई। उन्होंने गोदाम के पदाधिकारी के सामने विरोध दर्ज कराया और सवाल उठाया कि यदि यही चावल आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को खिलाया गया और इससे बच्चे बीमार पड़ गए तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। विरोध के बाद कई सेविकाओं ने चावल लेने से साफ इनकार कर दिया। इस दौरान गोदाम परिसर में चावल की गुणवत्ता को लेकर काफी देर तक विरोध की स्थिति बनी रही।


विरोध के बाद रोका गया चावल वितरण

मामले को लेकर गोदाम मैनेजर चंदन चौधरी ने फोन पर बताया कि सेविकाओं के विरोध के बाद चावल का वितरण रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने चावल लिया है, उन्होंने अपनी इच्छा से लिया है, जबकि जिन लोगों ने लेने से मना किया, उन्होंने चावल नहीं लिया। उन्होंने बताया कि आगे चावल आने के बाद दोबारा वितरण किया जाएगा।


चावल की गुणवत्ता जांच पर उठे सवाल

मामले के सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए भेजे गए चावल की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई। यदि चावल वास्तव में सड़ा-गला या कीड़े वाला है, तो उसे वितरण के लिए गोदाम तक पहुंचने से पहले ही क्यों नहीं रोका गया? सेविकाओं ने बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए अच्छी गुणवत्ता वाले चावल की आपूर्ति और वितरण की मांग की है।

मुजफ्फरपुर से रंजन कुमार की रिपोर्ट