मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से सामने आए झपहां उदनडीह मामले में सीतामढ़ी के बेलसंड विधानसभा क्षेत्र से लोजपा (रामविलास) विधायक अमित कुमार रानू की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। अहियापुर थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में घरों और चहारदीवारी को कथित रूप से तोड़े जाने तथा जमीन पर कब्जे के आरोपों की जांच पुलिस कर रही है। इसी क्रम में पुलिस मुख्यालय ने विधायक के खिलाफ अब तक हुई कार्रवाई और दर्ज मामलों से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को भेजी है।

पुलिस की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को भेजी गई रिपोर्ट के बाद यह मामला अब केवल स्थानीय स्तर का विवाद नहीं रह गया है। राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी इस प्रकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट में विधायक पर कथित तौर पर भू-माफिया को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोपों का भी उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

विशेष MP-MLA कोर्ट में वारंट की तैयारी

मुजफ्फरपुर पुलिस अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र के अनुसार विधायक अमित कुमार रानू के खिलाफ जल्द ही विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में वारंट के लिए आवेदन दिया जा सकता है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, वारंट की कार्रवाई से पहले केस डायरी को विस्तृत और मजबूत किया जा रहा है। जांच से जुड़े दस्तावेज, घटनास्थल से मिले तथ्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों को केस डायरी का हिस्सा बनाया जा रहा है। पुलिस का प्रयास है कि अदालत के समक्ष मामले से जुड़े सभी तथ्यों को व्यवस्थित तरीके से रखा जा सके।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में केवल आरोपों और बयानों पर निर्भर रहने के बजाय वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी अहम माना जा रहा है। घटनास्थल से संबंधित जानकारी और अन्य तकनीकी प्रमाणों को एक साथ जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ी तैयार की जा रही है।

विधायक की संपत्ति की भी जांच के संकेत

झपहां उदनडीह मामले की जांच अब कथित जमीन विवाद से आगे बढ़ती नजर आ रही है। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र के मुताबिक विधायक की संपत्ति से जुड़े पहलुओं की जांच के लिए आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU को पत्र भेजा गया है। EOU को भेजे गए पत्र के बाद अब विधायक की संपत्ति, आर्थिक लेन-देन और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की संभावना बढ़ गई है। जांच में यह देखा जा सकता है कि मामले से जुड़े आर्थिक पक्ष क्या हैं और जमीन से संबंधित गतिविधियों में किसी तरह का वित्तीय लेन-देन हुआ है या नहीं। हालांकि, EOU की जांच का दायरा और उसके निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल पुलिस विभिन्न पहलुओं से मामले की पड़ताल कर रही है।

नामजद आरोपियों के खिलाफ दबिश तेज

इस मामले में पुलिस ने अन्य नामजद और आरोपित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस टीमों की ओर से संभावित ठिकानों पर दबिश देने की कार्रवाई की जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसके अलावा जमीन से संबंधित दस्तावेज, घटनास्थल की परिस्थितियां और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस इन सभी जानकारियों को आपस में जोड़कर घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है।

क्या है झपहां उदनडीह मामला?

अहियापुर थाना क्षेत्र के झपहां उदनडीह इलाके से जुड़ा यह मामला जमीन और निर्माण से संबंधित विवाद के आरोपों के बाद सामने आया था। आरोप है कि कुछ घरों और चहारदीवारी को तोड़ने के साथ जमीन पर कब्जे की कोशिश की गई। इसी मामले में कई लोगों को नामजद किया गया और पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान विधायक अमित कुमार रानू का नाम भी सामने आया। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई का दायरा बढ़ा और मामले में विधायक की कथित भूमिका को लेकर जांच शुरू हुई। पुलिस की रिपोर्ट में विधायक पर भू-माफिया को संरक्षण देने जैसे आरोपों का उल्लेख किए जाने की बात कही गई है। विधायक के खिलाफ लगाए गए आरोपों को फिलहाल पुलिस जांच का हिस्सा माना जा रहा है। किसी भी आरोप को अदालत में साबित किए जाने तक उसे आरोप के रूप में ही देखा जाएगा।

अब अदालत के रुख पर टिकी नजर

पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंचने और विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में वारंट के लिए आवेदन की तैयारी के बाद मामले की अगली दिशा अदालत की कार्रवाई से तय होने की संभावना है। अगर पुलिस वारंट के लिए आवेदन दाखिल करती है तो अदालत उपलब्ध केस डायरी और साक्ष्यों के आधार पर इस पर फैसला करेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में झपहां उदनडीह कांड में पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया पर भी सभी की नजर रहेगी।

फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता मामले में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित करना और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना है। विधायक की संपत्ति से जुड़े पहलुओं की जांच के लिए EOU को भेजे गए पत्र ने भी इस प्रकरण को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच आगे बढ़ने पर पुलिस के हाथ कौन-कौन से नए तथ्य लगते हैं और विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है।