Shravani Mela 2026: श्रावणी मेला 2026 की तैयारियों के साथ ही मुंगेर के 26 किलोमीटर लंबे कांवड़िया पथ पर व्यावसायिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. हर साल लाखों शिवभक्तों के आगमन को देखते हुए इस मार्ग पर छोटे-बड़े मिलाकर करीब ढाई हजार दुकानें और अस्थायी स्टॉल लगाए जाते हैं. इस बार भी दुकानदारों ने अपनी दुकानें लगाने के लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी है, लेकिन बढ़े हुए किराए ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है.
कांवड़िया पथ पर जमीन का किराया इस बार पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक हो गया है. जिन स्थानों पर बड़ी संख्या में कांवड़िये रात्रि विश्राम करते हैं या जहां श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक रहती है, वहां जमीन के दाम सबसे ज्यादा हैं. ऐसे स्थानों पर दुकान लगाने के लिए व्यापारियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है.
असरगंज प्रखंड के करीब छह किलोमीटर लंबे कांवड़िया मार्ग पर अधिकांश जमीन कट्ठा के हिसाब से किराये पर दी जाती है. यहां कई जगहों पर पांच कट्ठा जमीन का किराया डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच गया है, जबकि अपेक्षाकृत कम भीड़ वाले स्थानों पर यही किराया करीब 25 हजार रुपये तय किया गया है.
वहीं तारापुर प्रखंड के आठ किलोमीटर लंबे कांवड़िया पथ पर धोबई टेंट सिटी, छतहार मोड़, बिहमा और गोगाचक धर्मशाला के आसपास जमीन की सबसे अधिक मांग है. इन इलाकों में 100 फीट जमीन के लिए कारोबारियों को डेढ़ लाख रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं. जबकि अन्य स्थानों पर यही किराया 40 से 50 हजार रुपये के बीच है.
संग्रामपुर प्रखंड के 12 किलोमीटर लंबे कांवड़िया मार्ग पर भी जमीन के किराये में इस बार बढ़ोतरी की गई है. भू-स्वामियों ने पिछले साल की तुलना में लगभग 50 रुपये प्रति वर्ग फीट तक किराया बढ़ा दिया है वर्तमान में यहां जमीन का किराया 150 से 200 रुपये प्रति वर्ग फीट के बीच तय किया जा रहा है.
श्रावणी मेला शुरू होने में अभी समय है, लेकिन कई स्थानों पर खानपान, पूजा सामग्री, फल, शीतल पेय और दैनिक उपयोग की दुकानों के लिए जमीन की बुकिंग शुरू हो चुकी है. आने वाले दिनों में जैसे-जैसे मेला नजदीक आएगा, वैसे-वैसे कांवड़िया पथ पर व्यावसायिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है. स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, इसलिए अधिक किराया होने के बावजूद दुकानदार अच्छी कमाई की उम्मीद में पहले से ही अपनी जगह सुरक्षित कराने में जुट गए हैं.