MUNGER: मुंगेर विश्वविद्यालय में छात्रहित से जुड़ी 10 सूत्री मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। सोशलिस्ट स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के बैनर तले विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर शुरू हुई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। अनशन पर बैठे छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और सभी अनशनकारियों की जांच की। छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


मुंगेर विश्वविद्यालय में छात्रहित से जुड़ी 10 सूत्री मांगों को लेकर सोशलिस्ट स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने आंदोलन शुरू कर दिया है। संगठन के विश्वविद्यालय अध्यक्ष श्रवण कुमार के नेतृत्व में छात्र विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलन का मंगलवार को दूसरा दिन रहा।


इस दौरान अनशन पर बैठे छात्रों की स्वास्थ्य जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सभी अनशनकारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और उनकी स्थिति का जायजा लिया।


अनशन का नेतृत्व कर रहे विश्वविद्यालय अध्यक्ष श्रवण कुमार ने बताया कि छात्रों की प्रमुख मांगों में मुंगेर विश्वविद्यालय के लिए स्थायी जमीन का अधिग्रहण कर जल्द शिलान्यास कराने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था करने और नियमित रूप से कक्षाएं संचालित कराने की मांग शामिल है।


इसके अलावा नामांकन, रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फॉर्म भरने के लिए ऑनलाइन आवेदन के दौरान लिए जाने वाले गेटवे शुल्क में कथित अनियमितता का मुद्दा भी उठाया गया है। छात्रों का आरोप है कि निर्धारित 35 रुपये के बजाय 200 रुपये से अधिक शुल्क वसूला जा रहा है। उन्होंने इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।


छात्रों की अन्य मांगों में परीक्षा परिणामों में कथित छेड़छाड़ पर रोक लगाने और निर्धारित समय पर पारदर्शी तरीके से रिजल्ट प्रकाशित करने की मांग भी शामिल है।


छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। कई बार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं होने के कारण उन्हें भूख हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है।


वहीं, विश्वविद्यालय अध्यक्ष श्रवण कुमार ने स्पष्ट कहा है कि जब तक कुलपति उनकी सभी 10 सूत्री मांगों को स्वीकार नहीं करते, तब तक अनिश्चितकालीन आमरण अनशन जारी रहेगा। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस आंदोलन पर क्या पहल की जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

इम्तियाज की रिपोर्ट