PATNA:भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी की कार्रवाई जारी है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में दर्ज कांड में न्यायालय ने मुंगेर के हवेली खड़गपुर अंचल के राजस्व कर्मचारी अशोक पासवान को दोषी करार दिया है। दो साल की सजा और 10 हजार रुपया आर्थिक जुर्माना लगाया गया है। अशोक को 12 जुलाई 2007 में 1500 रुपये घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया था। घूसखोरी मामले में दोषी पाये जाने के बाद 19 साल बाद कोर्ट ने सजा सुनाई।


भागलपुर विशेष निगरानी कोर्ट के न्यायाधीश दीपक कुमार-I की अदालत ने अभियुक्त अशोक पासवान, सम्प्रति राजस्व कर्मचारी, अंचल हवेली खड़गपुर, जिला-मुंगेर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13 (2) सह पठित धारा 13 (1) (डी) के तहत निगरानी थाना कांड संख्या-85/2007 (विशेष वाद सं-27/2007) में दोषी ठहराया।


यह मामला परिवादी सीताराम मंडल, पिता-श्री हलखोरी मंडल, ग्रम-मिर्जाचक, थाना-बरियारपुर, जिला-मुंगेर से अभियुक्त श्री अशोक पासवान, सम्प्रति राजस्व कर्मचारी, अंचल हवेली खड़गपुर, जिला-मुंगेर द्वारा परिवादी से तीन केवाला दाखिल खारिज करने के एवज में 1800/-रूपया रिश्वत माँगने का आरोप लगाया गया। जिसमें आरोपी को दिनांक-12.07.2007 को 1500/- रूपया रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।


इस मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता उपेन्द्र प्रसाद सिंह, पुलिस निरीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा सटीक और समय पर आरोप-पत्र दायर किया गया। अभियोजन द्वारा कुल 08 साक्षियों की गवाही कराई गई। बिहार सरकार की ओर से रामबदन कुमार चौधरी, प्रभारी विशेष लोक अभियोजक निगरानी, भागलपुर ने प्रभावी तरीके से पैरवी की और आरोपी को दोष सिद्ध कराने में सफलता हासिल की।


आरोपी अशोक पासवान, सम्प्रति राजस्व कर्मचारी, अंचल हवेली खड़गपुर, जिला-मुंगेर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 में दो वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/- (दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। धारा-13 (2) सह पठित धारा-13 (1) (डी) में दो वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/- (दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने पर एक महीने का साधारण कारावास होगा। दोनों सजा साथ-साथ चलेगी।


अब तक वर्ष 2026 में कुल 10 भ्रष्टाचार के मामले में न्यायालय द्वारा सजा सुनायी गई है। वर्तमान कांड में दोषसिद्ध की कार्रवाई श्री दीपक कुमार-1, माननीय न्यायाधीश, विशेष न्यायालय निगरानी, भागलपुर द्वारा की गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अभियोजन की कार्यवाही लगातार जारी है।