Bihar Flood Alert: मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही बाढ़ का संकट भी गहराता जा रहा है। शहर से लेकर गांव तक हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। मुंगेर नगर निगम के वार्ड संख्या 40, 41 और 42—करबला, कासिम बाजार और चूआबाग की बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में है। कहीं घरों में तीन फीट तक पानी है, तो कहीं मुख्य सड़क से घर तक पहुंचने के लिए लोगों को जुगाड़ की नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि घरों की छतें लोगों का नया ठिकाना बन गई हैं और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवार सड़क पर आने को मजबूर हैं।
मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से 42 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है और इसका सीधा असर निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। जिले में आए बाढ़ ने 28 पंचायतों समेत निगम में कई वार्ड को प्रभावित कर रखा है इस बााढ़ ने लगभग 40 हजार जनसंख्या को प्रभावित कर दिया है । नगर निगम के वार्ड संख्या 40, 41 और 42 के करबला, कासिम बाजार और चूआबाग में बाढ़ का पानी लोगों के घरों तक पहुंच चुका है। कहीं घर के अंदर ढाई से तीन फीट पानी है, तो कहीं शौचालय पूरी तरह डूब चुके हैं। घर में रखा सामान पानी में डूबा है और लोग अपनी आंखों के सामने अपनी गृहस्थी को बर्बाद होते देखने को मजबूर हैं।
जिनके पास पक्के मकान और छत है, वे परिवार समेत छतों पर डेरा डाले हुए हैं। वहीं कच्चे मकानों में रहने वाले लोग अपना घर छोड़कर सड़क किनारे शरण लेने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और स्कूली छात्र-छात्राओं को हो रही है। कमर तक पानी में घुसकर बच्चे स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं। वहीं छात्राएं खाखड़ा और दूसरे सामान से तैयार की गई जुगाड़ की नाव के सहारे पढ़ाई के लिए निकल रही हैं। तीन दिनों से इलाके की यही तस्वीर है। पानी लगातार बढ़ रहा है, लेकिन लोगों का आरोप है कि अब तक कोई उनकी सुध लेने तक नहीं पहुंचा। घरों में महिलाएं पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। बाहर निकलने का रास्ता पानी ने रोक दिया है। यानी पूरा इलाका मानो जल कैद में तब्दील हो चुका है।
उधर, गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड में है। जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने सभी संबंधित अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित और कटाव संभावित इलाकों में लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया है। नाव, मोटरबोट, लाइफ जैकेट, मेडिकल सुविधा दवाइयों, पेयजल और राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाने का काम भी शुरू किया गया है। राहत शिविरों में सामुदायिक रसोई की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। तीन से चार हजार बाढ़ पीड़ित अभी राहत शिविरों में रह भोजन प्राप्त कर रहे है ।प्रशासन ने ‘जीरो कैजुअल्टी’ का लक्ष्य रखा है। लेकिन जमीन पर सवाल यही है कि पानी से घिरे इन इलाकों में रहने वाले लोगों तक राहत कितनी जल्दी पहुंचती है।
रिपोर्ट- इम्तियाज खान, मुंगेर