Bihar Flood News: मुंगेर में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने नीरपुर पंचायत के लालजी टोला के कई परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बाढ़ का पानी घरों के आसपास पहुंचने के बाद लोग अपना सामान समेटकर सुरक्षित जगह की तलाश में निकल पड़े. फिलहाल कई परिवार बरियारपुर-कल्याणपुर के बीच रेलवे ट्रैक के किनारे प्लास्टिक और तिरपाल के सहारे रहने को मजबूर हैं.
जिन घरों में कुछ दिन पहले तक परिवार चैन से रह रहा था, वहां अब बाढ़ का पानी और खतरा मंडरा रहा है. घर छोड़कर रेलवे ट्रैक के किनारे पहुंचे लोगों के पास न पर्याप्त बिस्तर है और न ही रात गुजारने के लिए कोई सुरक्षित व्यवस्था. खुले आसमान के नीचे परिवार अपने बच्चों और जरूरी सामान के साथ समय काट रहे हैं.
रेल पटरी के किनारे दिन किसी तरह गुजर जाता है, लेकिन रात होते ही परेशानी बढ़ जाती है. कुछ ही दूरी से लगातार ट्रेनों के गुजरने के कारण लोगों को ठीक से सोने का मौका नहीं मिल पाता. महिलाएं बच्चों को लेकर किसी तरह रात बिताती हैं, जबकि पुरुष अपने सामान और मवेशियों की देखभाल के लिए जागते रहते हैं.
प्लास्टिक और तिरपाल के सहारे बना अस्थायी ठिकाना
लालजी टोला के लोगों ने रेलवे ट्रैक के किनारे प्लास्टिक और तिरपाल लगाकर अस्थायी ठिकाने बना लिए हैं. घर से निकलते समय लोग अपने साथ जितना जरूरी सामान ले जा सके, उसे बोरे और गठरी में बांधकर ले आए. अब यही सामान उनके अस्थायी आशियाने में जमा है.
बाढ़ पीड़ितों के सामने सबसे बड़ी परेशानी बच्चों को लेकर है. खुले स्थान पर रहने के कारण बच्चों को मच्छरों, गंदगी और मौसम की मार झेलनी पड़ रही है. साफ पानी और भोजन की व्यवस्था भी उनके लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है.
दिन में सामान और बच्चों की चिंता, रात में ट्रेनों का डर
रेलवे ट्रैक के किनारे रहने वाले परिवारों का कहना है कि घर छोड़ना उनकी मजबूरी है. गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद घरों में रहना सुरक्षित नहीं रह गया था. ऐसे में जान-माल की सुरक्षा के लिए उन्हें अपना घर छोड़कर यहां आना पड़ा.
दिन के समय परिवार अपने सामान को संभालने और बच्चों की देखभाल में लगे रहते हैं. शाम होते ही रात गुजारने की चिंता सताने लगती है. एक तरफ बाढ़ का पानी बढ़ने का डर है तो दूसरी तरफ रेलवे ट्रैक के किनारे रहने की मजबूरी.
सुरक्षित ठिकाने और जरूरी सुविधाओं की मांग
बाढ़ पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से सुरक्षित स्थान पर रहने की व्यवस्था कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें फिलहाल रहने के लिए सुरक्षित जगह के साथ-साथ भोजन, पीने का पानी, बच्चों के लिए जरूरी सामान और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है.
लालजी टोला के लोगों के लिए बाढ़ सिर्फ घरों तक पहुंचा पानी नहीं है. इसने उनसे उनका सुरक्षित आशियाना और रोजमर्रा की जिंदगी दोनों छीन ली है. अब रेलवे ट्रैक के किनारे बीत रही हर रात उन्हें अपने घर और सामान्य जिंदगी की याद दिला रही है.