Bihar News: भारत और नेपाल के बीच दशकों पुराने बेटी-रोटी के रिश्ते के बीच अब व्यापार को लेकर विवाद सामने आया है। नेपाल सरकार की ओर से भारतीय किसानों की सब्जियों को अपने बाजारों में बेचने पर रोक लगाए जाने के बाद बिहार के सीमावर्ती इलाकों में किसानों का आक्रोश बढ़ गया। शनिवार को मधुबनी जिले में नाराज किसानों ने भारत-नेपाल सीमा पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और मुख्य सड़क को घंटों जाम रखा।




जयनगर थाना क्षेत्र के बेतौंहा गांव स्थित भारत-नेपाल के माड़र बॉर्डर कस्टम चेक पोस्ट पर सुबह करीब 10 बजे किसानों ने सड़क जाम कर दिया। यह जाम दोपहर करीब 2 बजे तक जारी रहा। इस दौरान किसानों ने बेतौंहा-माड़र के साथ-साथ हथलेटवा बॉर्डर को भी बंद कर दिया। इसके कारण दोनों देशों के बीच पैदल और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। किसानों के प्रदर्शन के कारण भारत और नेपाल सीमा के दोनों ओर सैकड़ों लोग फंस गए। इनमें स्कूली बच्चे, मरीज और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोग शामिल थे। बॉर्डर बंद रहने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।




स्थिति की जानकारी मिलने पर एसएसबी की 48वीं बटालियन, जयनगर के अंतर्गत बेतौंहा बीओपी के इंस्पेक्टर एमएस विश्वकर्मा जवानों के साथ मौके पर पहुंचे। वहीं, नेपाल की ओर से माड़र एपीएफ के डीएसपी पादम खाड़क भी अपने जवानों के साथ जाम स्थल पर पहुंचे। दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों ने किसानों से काफी देर तक बातचीत की और उन्हें समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों की पहल के बाद दोपहर करीब 2 बजे किसानों ने जाम समाप्त कर दिया।




आंदोलन में शामिल किसानों ने बताया कि उनके खेत भारत-नेपाल सीमा से सटे बेतौंहा, कमलावाड़ी, अर्राहा, छर्रापट्टी और हथलेटवा गांवों में हैं। किसान पिछले 20 से 25 वर्षों से अपने खेतों में उगाई गई परवल, भिंडी, बैंगन, टमाटर और हरी सब्जियां नेपाल के माड़र, लहान और सिरहा बाजारों में बेचते आ रहे हैं। उनका कहना है कि भारतीय सीमा से माड़र बाजार की दूरी महज 1 से 2 किलोमीटर है। ऐसे में यह बाजार उनके लिए सबसे नजदीकी और फायदेमंद मंडी है। लंबे समय से इसी बाजार पर उनकी आजीविका निर्भर रही है।




किसानों ने आरोप लगाया कि शनिवार सुबह जब वे साइकिल और टेंपो पर सब्जियां लादकर नेपाल के माड़र बाजार जा रहे थे, तभी नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (APF) के जवानों ने उन्हें बॉर्डर पर रोक दिया। किसानों के मुताबिक, नेपाली जवानों ने बताया कि वरीय अधिकारियों का आदेश है कि व्यावसायिक मात्रा में भारतीय सब्जियों को नेपाल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।




इससे किसानों की बड़ी मात्रा में सब्जियां बॉर्डर पर ही फंस गईं। किसानों ने आशंका जताई कि समय पर बिक्री नहीं होने से सैकड़ों क्विंटल सब्जियां खराब हो सकती हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। माड़र बॉर्डर के एपीएफ डीएसपी पादम खाड़क ने बताया कि व्यावसायिक मात्रा में सब्जियों के आयात पर रोक लगाने का आदेश उनके वरीय अधिकारियों की ओर से दिया गया है।




उन्होंने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य नेपाली किसानों को नुकसान से बचाना है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दैनिक उपयोग के लिए भारतीय सब्जियां ले जाने पर पूरी छूट है। कोई भी व्यक्ति 10 से 20 किलोग्राम तक सब्जियां भारत से नेपाल ले जा सकता है। बॉर्डर पर घंटों जाम में फंसे नेपाल के सिरहा जिले के लहान गांव निवासी मो. अबुल ऐस ने भी इस प्रतिबंध पर नाराजगी जताई।




उन्होंने कहा कि इस तरह की रोक से दोनों देशों के आम लोगों को परेशानी हो रही है। सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों का आपसी कारोबार और रोजमर्रा का आवागमन प्रभावित न हो। फिलहाल किसानों के विरोध और सुरक्षा अधिकारियों की बातचीत के बाद बॉर्डर पर आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। हालांकि, भारतीय सब्जियों की व्यावसायिक बिक्री पर लगी रोक को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है।