Bihar Bhumi: बिहार के मधुबनी नगर थाना में नगर निगम के मेयर के पुत्र, उपमेयर सहित कुल 47 लोगों के विरुद्ध सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण और फर्जी तरीके से निबंधन कराने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई जिला प्रशासन के निर्देश पर रहिका अंचल के अंचलाधिकारी (सीओ) के आवेदन के आधार पर की गई है।
प्राथमिकी के अनुसार, मधुबनी नगर थाना क्षेत्र के तिलक चौक स्थित केंद्रीय पुस्तकालय के पीछे अवस्थित थाना नंबर-33, खाता संख्या-312, खेसरा संख्या-89, रकबा 3 बीघा 18 कट्ठा 7 धुर भूमि सी.एस. खतियान में गैरमजरूआ खास (सरकारी पोखर) के रूप में दर्ज है। आरोप है कि पिछले लगभग 40 वर्षों से इस सरकारी पोखर का अवैध रूप से निबंधन कराकर अतिक्रमण किया जाता रहा और धीरे-धीरे उसे भरकर उस पर निर्माण एवं खरीद-बिक्री की गई।
सरकारी आदेश के बाद अतिक्रमणकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध संबंधित थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया। इसी क्रम में रहिका अंचल के सीओ द्वारा नगर थाना में आवेदन दिया गया, जिसके आधार पर 3 जुलाई 2026 को कांड संख्या 337/26 दर्ज किया गया।
प्राथमिकी में नगर निगम के मेयर अरुण राय के पुत्र प्रशांत कुमार, नगर निगम के उपमेयर अमानुल्लाह खान, पूर्व नगर परिषद चेयरमैन रेखा नायक के पति सुनील नायक, उपमेयर के भाई समीउल्लाह खान, आभा कर्ण, कैलाश कारक, प्रभात कुमार सिंह, सुभाष चंद्र झा सहित कुल 47 लोगों को नामजद किया गया है।
सभी आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 318(4), 322, 338, 336(3), 340(2), 329(3), 324(5), 61(2) एवं 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद शहर में इस मामले की व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। प्राथमिकी में कई रसूखदार, दबंग, सफेदपोश और कथित भूमाफियाओं के नाम सामने आने से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
आरोप है कि सरकारी पोखर एवं अन्य सरकारी भूमि पर संगठित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर निबंधन कराया गया, भूमि को भरकर उस पर मकान, दुकान, कोठी, बंगले, मॉल और अन्य व्यावसायिक निर्माण कर उनकी खरीद-बिक्री की गई।
गौरतलब है कि पिछले महीने मधुबनी के पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि जल्द ही शहर के भूमाफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और लोग उन्हें जेल जाते देखेंगे। अब इस प्राथमिकी के दर्ज होने के बाद आम लोगों में चर्चा है कि जिस थाने में पहले भूमाफियाओं के विरुद्ध शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती थी, वहीं अब जिला प्रशासन के निर्देश पर बड़े पैमाने पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन सरकारी भूमि एवं सरकारी पोखरों पर कब्जा कर उन्हें बेचने वाले कथित भूमाफियाओं के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई करेगा? क्या इस मामले में नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी होगी और अवैध अतिक्रमण हटाया जाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे।
रिपोर्ट : कुमार गौरव, मधुबनी