MADHUBANI: बिहार के मधुबनी जिले के पंडौल प्रखंड स्थित लोहट में सीमेंट प्लांट लगाने की योजना का स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है। किसान, मजदूर, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग यहां सीमेंट प्लांट की जगह नई चीनी मिल स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता रंजीत कुमार मंडल पिछले 52 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
आंदोलन को अब कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों का समर्थन मिल रहा है। हिंद मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अघनु यादव, समाजसेवी संतोष झा, किसान-मजदूर मोर्चा से जुड़े गणेश मंडल समेत शंभू सिंह, फेंकू यादव, अभिषेक ठाकुर, राम स्वरूप भारती, वकील यादव, विनोद दास और शशिभूषण मंडल ने भी आंदोलन के समर्थन में आवाज उठाई है।
धरनास्थल पर आयोजित बैठक में आसपास के गांवों की महिलाओं समेत बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। बैठक में आंदोलनकारियों ने कहा कि लोहट में नई चीनी मिल स्थापित कराने के लिए मधुबनी से पटना तक आंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बिहार विधानसभा का घेराव कर सरकार पर मांग पूरी करने का दबाव बनाया जाएगा।
1914 में हुई थी लोहट चीनी मिल की स्थापना
मधुबनी जिले के पंडौल प्रखंड में स्थित लोहट चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1914 में दरभंगा महाराज ने ब्रिटिश काल के दौरान कराई थी। करीब 225 एकड़ में फैली इस मिल में 150 एकड़ कृषि फार्म और 75 एकड़ में कारखाना एवं आवासीय परिसर था।
एक समय यह चीनी मिल इलाके की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करती थी। यहां किसानों को गन्ना बेचने का अवसर मिलता था, जबकि मजदूरों को रोजगार मिलता था। मिल से जुड़े कारोबार के कारण स्थानीय बाजारों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ती थीं।
हालांकि, वर्ष 1996 में मिल बंद होने के बाद क्षेत्र में रोजगार के अवसर कम हो गए। इससे गन्ना किसानों, मजदूरों और मिल पर निर्भर कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई।
सीमेंट प्लांट की जगह चीनी मिल चाहते हैं स्थानीय लोग
लोहट चीनी मिल की जमीन पर जेके लक्ष्मी सीमेंट प्लांट लगाने की योजना को लेकर स्थानीय लोगों की आपत्ति सामने आई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यहां नई चीनी मिल स्थापित होने से गन्ने की खेती को प्रोत्साहन मिल सकता है और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए स्थानीय बाजार उपलब्ध हो सकता है।
उनका मानना है कि चीनी मिल शुरू होने से खेतिहर मजदूरों, कारखाना श्रमिकों, छोटे कारोबारियों और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे इलाके की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।
वहीं, सीमेंट प्लांट को लेकर कुछ स्थानीय लोगों ने प्रदूषण की आशंका जताई है। उन्हें चिंता है कि फैक्ट्री से निकलने वाली धूल और अन्य प्रदूषकों का आसपास के गांवों के लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। हालांकि, प्रदूषण के संभावित स्तर और स्वास्थ्य पर उसके प्रभाव का आकलन संबंधित पर्यावरणीय जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
लोहट में सीमेंट प्लांट और नई चीनी मिल को लेकर चल रहा विवाद अब स्थानीय रोजगार, किसानों की आय और क्षेत्र के औद्योगिक विकास से जुड़ा मुद्दा बन गया है। आंदोलनकारी चाहते हैं कि सरकार लोहट की ऐतिहासिक चीनी मिल की जमीन पर नई चीनी मिल स्थापित करने की मांग पर विचार करे।
अब सवाल है कि क्या सरकार स्थानीय लोगों की मांग पर नई चीनी मिल लगाने की दिशा में कदम उठाएगी? क्या लोहट में फिर से चीनी उद्योग शुरू होने से किसानों और मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे? फिलहाल, 52 दिनों से जारी धरने के बीच स्थानीय लोगों की नजर सरकार के अगले कदम पर है।